इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अजित कुमार की अदालत ने कर्मचारी नेता व कानपुर में तैनात रक्षा लेखा विभाग के वरिष्ठ लेखा परीक्षक राजेश प्रताप सिंह के पुणे तबादले पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही केंद्र सरकार से चार हफ्ते में जवाब तलब किया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) प्रयागराज पीठ के नियमित मुकदमे प्रधान पीठ में सुने जाने पर नाराजगी जताई है। कहा, कैट अधिनियम की धारा-25 और नियम-6 के तहत नई दिल्ली स्थित प्रधान पीठ में प्रयागराज पीठ के क्षेत्राधिकार का नियमित प्रयोग अनुचित है।
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इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अजित कुमार की अदालत ने कर्मचारी नेता व कानपुर में तैनात रक्षा लेखा विभाग के वरिष्ठ लेखा परीक्षक राजेश प्रताप सिंह के पुणे तबादले पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही केंद्र सरकार से चार हफ्ते में जवाब तलब किया है।
याचिका की पोषणीयता पर केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने सवाल उठाया। कहा कि इस स्तर पर मामले की सुनवाई का पहला अधिकार कैट को है। कैट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हो सकती है। मौजूदा समय में मामलों की सुनवाई दिल्ली स्थित कैट की प्रधान पीठ कर रही है।
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वहीं, जवाब देते हुए कहा कि कैट की प्रधान पीठ में प्रयागराज के नियमित क्षेत्राधिकार के मामलों की सुनवाई की जा रही है, जो कैट अधिनियम के विपरीत है। क्षेत्राधिकार हनन के खिलाफ इलाहाबाद पीठ के अधिवक्ता कैट में आंदोलन कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से ही याची को राहत मिल सकती है।
इसके अलावा दलील दी कि याची अखिल भारतीय रक्षा लेखा कर्मचारी संघ के चुने हुए पदाधिकारी हैं। विभाग की 28 मार्च 2014 की स्थानांतरण नीति के तहत संघ के पदाधिकारी के रूप में कार्य करने के दौरान याची का तबादला तब तक नहीं किया जा सकता, जब तक कि जब तक प्रशासनिक जरूरत न हो। मौजूदा मामले में ऐसी कोई प्रशासनिक जरूरत नहीं है।