यह आदेश न्यायमूर्ति एम के गुप्ता तथा न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने जगदीश प्रसाद अग्रवाल की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। मामले में बीएचयू व याची के बीच करार हुआ था, जिसके तहत याची को परिसर में धर्मशाला बनाने की अनुमति दी गई। याची ने धर्मशाला का निर्माण भी कर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) वाराणसी परिसर में सहमति से धर्मशाला बनाने वाले से विद्युत व जल आपूर्ति के मद में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 11.23 लाख रुपये की मांग करने के खिलाफ याचिका पर हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि नोटिस को चुनौती देना समझ से परे है। याची नोटिस का जवाब दे सकता है और जबरन वसूली के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति एम के गुप्ता तथा न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने जगदीश प्रसाद अग्रवाल की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। मामले में बीएचयू व याची के बीच करार हुआ था, जिसके तहत याची को परिसर में धर्मशाला बनाने की अनुमति दी गई। याची ने धर्मशाला का निर्माण भी कर दिया।
इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिजली. पानी आपूर्ति मद में धन जमा करने का नोटिस दिया, जिसे चुनौती दी गई थी। याची का कहना था कि करारनामे में इसका उल्लेख नहीं है। इसलिए याची से बिजली, पानी की आपूर्ति के खर्च की मांग नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा नोटिस का जवाब दे सकते हैं और हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया।