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लीवर की बामीरियों से बचने को कम करें मोटापा

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Reduce obesity by avoiding liver barbecues - फोटो : CITY DESK
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लिवर की बीमारियों से बचने को कम करें मोटापा
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0 घी हो या तेल, 30 दिन में 500 ग्राम से अधिक सेवन नुकसानदेह
0 गैस्ट्रो केयर की कांफ्रेंस में विशेषज्ञों ने बताए बचाव के उपाय
प्रयागराज।
पेट या लिवर संबंधी बीमारियां किसी भी मरीज के लिए घातक हैं। इसका सबसे बड़ा कारण मोटापा है। मोटापा नियंत्रित करेंगे को लिवर दुरुस्त रहेगा। इसके लिए शुद्ध पानी और चिकनाई का भोजन में कम प्रयोग करें। विशेषज्ञों ने बताया कि भोजन में घी, सरसों का तेल या रिफाइंड का प्रयाग करें, लेकिन महीने भर में इसकी मात्रा 500 ग्राम से ज्यादा न हो। कम चिकनाई और चोकरयुक्त आटा पाचन क्रिया को दुरुस्त रखकर बीमारियों से बचाता है।
यह बातें रविवार को एएमए सभागार में आयोजित गैस्टो केयर अपटेड कांफ्रेंस में आयोजन सचिव डॉ. वली उल्ला ने बताईं। उन्होंने कहा कि पैंक्रियाज(अग्नाशय) शरीर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है। पैंक्रियाज शरीर में इंसुलिन बनाने के साथ उसके नियंत्रण का काम भी करता है। जरा सी चूक साधारण मरीज को मधुमेह से पीड़ित कर सकती है। लोगों को आगाह किया गया कि किसी भी परेशानी के लिए खुद डॉक्टर बनकर या अन्य की सलाह पर मेडिकल स्टोर से दवा खरीद कर न खाएं। इससे मर्ज बढ़ जाता है और छोटी सी परेशानी गंभीर रोग में बदल जाती है।
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भूख न लगना, वजन कम होना
लिवर संबंधी बीमारियों के लक्षण
तकनीकी सत्र से इतर आम लोगों को सलाह दी गई कि पेट में किसी भी दिक्कत का लगातार बने रहना ठीक नहीं है। डॉ. वली उल्ला समेत अन्य विशेषज्ञों ने बताया कि भूख कम लगती है या नहीं लगती, कुछ भी खाने से मिचली आती है, लगातार वजन कम हो रहा है तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। लिवर संबंधी जांच कराएं, मामूली इलाज से लिवर संबंधी बीमारियां ठीक होती हैं।
डॉ. अशोक अग्रवाल, कांफ्रेंस के चेयरमैन डॉ. एसपी मिश्रा, डॉ. प्रबोल नियोगी, पीजीआई के डॉ. रजनीश समेत अन्य विशेषज्ञों ने लिवर संबंधी बीमारियों से बचाव और उपचार के बारे में जानकारी दी।
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शहर में लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा जल्द
0 अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में आधुनिक उपचार की दी जानकारी
0 लिवर, पैंक्रियाज, बिलियरी से जुड़ी बीमारियों पर चर्चा
प्रयागराज। शहर में जल्द ही लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध होगी। लिवर संबंधी बीमारियों के उपचार की आधुनिक विधियों की जानकारी देते हुए देश-विदेश से आए करीब 400 विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। लिवर सिरोसिस, पित्त की नली में रुकावट, पीलिया, हेपेटाइटिस ए, बी, सी समेत पैंक्रियाज, बिलियरी जैसे रोगों के उपचार पर चर्चा की गई।
अपोलो मेडिकेयर के डॉ. सुशील गटानी ने बतौर मुख्य अतिथि दीप जलाकर उद्घाटन किया। उन्होंने डॉक्टर और मरीज के बीच मानवीय संबंधों को बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहाकि डॉक्टर चिकित्सा सेवा की गुणवत्ता बढ़ाएं। समय के साथ आधुनिक उपचार करने का प्रयास करें। अब समय की मांग है कि न्यूनतम मूल्य पर मरीजों को चिकित्सा सेवा दी जाएं।
जापान के क्योटो विश्वविद्यालय से आईं डॉ. यूसी हीरो हिराता ने लिवर ट्रांसप्लांट की आधुनिक तकनीकों के बारे में बताया। उन्होंने स्लाइड शो के माध्यम से बताया कि यह प्रक्रिया पहले से अधिक सरल और सुलभ हो चुकी है। अब पीड़ित मरीज लिवर ट्रांसप्लांट के बाद लंबा और आसान जीवन जी सकते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में सरकारें कठिन नियमों के साथ लिवर ट्रांसप्लांट प्रक्रिया को सरल बनाने में लगी हैं।
कांफ्रेंस के चेयरमैन डॉ. एसपी मिश्रा ने बताया कि एमएलएन मेडिकल कॉलेज के एसआरएन अस्पताल में प्रदेश का पहले और आधुनिक गैस्ट्रोलॉजी विभाग में पेट और लीवर संबंधी बीमारियों का इलाज किया जा रहा है। आयोजन सचिव डॉ. वली उल्ला ने अतिथियों का स्वागत करतेे हुए जानकारी दी कि यहां से ट्रांसप्लांट छोड़कर लीवर संबंधी ऑपरेशन कराने के लिए मरीजों को दिल्ली या मुंबई जाने की जरूरत नहीं है। स्थानीय स्तर पर लीवर संबंधी गंभीर बीमारियों की सर्जरी की जा रही है। लिवर ट्रांसप्लांट करने के लिए औपचारिताएं पूरी की जा रही हैं। जल्द अपने शहर में यह कार्य भी किया जाएगा।
एसजीपीजीआई लखनऊ के डॉ. रजनीश ने पित्त की नली संबंधी विकार के उपचार, केजीएमयू के डॉ. अभिजीत चंद्रा ने पैक्रियाज सिस्ट(कोलेडोकल सिस्ट) और डॉ. सुभाष गुप्ता ने लीवर ट्रांसप्लांट के बारे में जानकारी दी। डॉ. लव कुमार काकर ने इंडोस्कोपी मैनेजमेंट, अन्य विशेषज्ञों ने शोध पत्र पढ़े और इलाज के विशिष्टताओं को भी स्लाइड शो के माध्यम से बताया।
तकनीकी सत्र में बांटे अनुभव
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने डॉ. जॉन मैथ्यू समेत अन्य चिकित्सकों ने अपने-अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि बड़ी सर्जरी करते समय ध्यान रखना होगा कि ब्लीडिंग ज्यादा न हो। गाल ब्लाडर की जांच करते समय कैंसर की संभावनाओं को जरूर परखें। पैंक्रियाज की परेशानी पैक्रेटाइटिस के बेहतर उपचार, लिवर सिरोसिस, लिवर एनाटॉमी, लिवर ट्रांसप्लांट, डोनर मैनेजमेंट, इनोवेशन इन एचपीबी समेत अन्य बीमारियों पर चर्चा की गई।
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कांफ्रेंस में डॉ. मनीषा द्विवेदी, डॉ. मुकुल पांडेय, डॉ. रोहित गुप्ता, डॉ. कुमार कीर्ति सिंह, डॉ. शबी अहमद, डॉ. आलोक मिश्रा, डॉ. टीपी यादव, प्रो. अजय शर्मा, डॉ. शिवेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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