नागरिक पुलिस और पीएसी में चार हजार से अधिक उपनिरीक्षकों और प्लाटून कमांडेंट की चयन प्रक्रिया पर रोक लग गई है। चयन के लिए आयोजित मुख्य परीक्षा में व्हाइटनर इस्तेमाल किए जाने को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने स्वयं आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक चयन प्रक्रिया पूरी तरह से रुकी रहेगी और इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। याचिकाओं की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति वीके बिड़ला ने याचिका पर इस आश्वासन को स्वीकार करते हुए 30 मार्च को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
इससे पूर्व कोर्ट के आदेश पर मंगलवार को अदालत के समक्ष आठ ऐसी ओएमआर सीट प्रस्तुत की गईं जिनमेें व्हाइटनर का प्रयोग किया गया था। जांच कमेटी की रिपोर्ट में बताया कि इन आठ में से छह अभ्यर्थियों ने व्हाइटनर लगाया है। अन्य ओएमआर सीट दो बक्सों में रखी गई थीं, जिनको अगली सुनवाई पर अदालत में खोला जाएगा। रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया था कि व्हाइटनर लगाने वाले कितने अभ्यर्थी चयनित कर लिए गए हैं। महाधिवक्ता ने बताया कि अभ्यर्थियों ने कुछ सवालों के जवाब में ही व्हाइटनर का प्रयोग किया है जबकि याचीगण के वकील सीमांत सिंह का कहना था कि जब व्हाइटनर प्रतिबंधित है तो पूरा परिणाम रद होना चाहिए। जांच के दौरान ही 16 मार्च को परिणाम भी जारी कर दिया गया। अभ्यर्थियों ने परिणाम को भी चुनौती दी है।
दरोगा भर्ती में शामिल अभ्यर्थी साकेत कुमार, संजीव द्विवेदी, अजय पाल सहित दर्जनों अभ्यर्थियों ने याचिकाएं दाखिल कर मुख्य परीक्षा में गंभीर धांधली का आरोप लगाया था। मुख्य परीक्षा में ओएमआर सीट पर कुछ लोगों ने व्हाइटनर और ब्लेड का प्रयोग गलत सवालों को सही किया जबकि निर्देश पुस्तिका में ही व्हाइटनर का प्रयोग मना था। व्हाइटनर लगाने वाले अभ्यर्थियों ने याचिका में अपना पक्ष रखने की अर्जी दी है।