अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई के बावजूद शराब माफिया पर लगाम लगती नहीं दिख रही है। पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर जिले भर में चल रहे इस गोरखधंधे को तगड़ी चोट देने का दावा किया। लेकिन नैनी में फिर शराब का अवैध कारोबार पकड़े जाने के बाद इस पूरी कवायद पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
कानपुर में जहरीली शराब पीने से मौत के बाद प्रदेश भर में हड़कंप मचा तो प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में कार्रवाई के निर्देश दिए। इसी के तहत जिले में भी चार दिन का विशेष अभियान चलाकर अवैध शराब के कारोबारियों की धरपकड़ की गई। जिलेभर में सैकड़ों लोग गिरफ्तार किए गए साथ ही हजारों लीटर शराब भी बरामद की गई। अफसरों ने दावा किया कि अभियान से अवैध शराब के गोरखधंधे पर रोक लगेगी। इसके बावजूद अवैध शराब के कारोबारियों पर लगाम नहीं लगी। एक दिन पहले ही बड़े पैमाने पर कार्रवाई के बाद शनिवार को फिर नैनी के अरैल में अवैध रूप से शराब बनती मिली। सूचना पर पहुंची आबकारी विभाग की टीम ने तीन मुकदमे दर्ज कराए और एक क्विंटल से ज्यादा लहन नष्ट कराई। सवाल यह है कि बड़े पैमाने पर कार्रवाई के बावजूद एक ही दिन बाद शराब माफिया ने कैसे फिर काम शुरू कर दिया। इससे कहीं ना कहीं स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े होते हैं।
थाने से ही मिल जाती है जमानत
गातार कार्रवाई के बाद भी अवैध शराब के गोरखधंधे पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही है तो इसकी अपनी वजह भी है। दरअसल अवैध शराब के मामलों में पकड़े गए लोगों को थाने से ही जमानत मिल जाती है। इनमें से ज्यादातर लोगों के पास रोजगार का अन्य कोई साधन नहीं है, इसलिए छूटते ही वह दोबारा इसी गोरखधंधे में जुड़ जाते हैं। ऐसे में जब तक इनके रोजगार व पुनर्वास के लिए उचित कदम नहीं उठाए जाएंगे तब तक इस धंधे पर पूरी तरह रोक लगाना संभव नहीं है।
अवैध शराब के कारोबार की जहां भी सूचना मिलती है, तत्काल कार्रवाई की जाती है। सभी थानेदारों को निर्देशित किया गया है कि वह अपने अपने क्षेत्र में भ्रमणशील रहकर अवैध शराब के कारोबारियों पर कार्रवाई करें।
सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज, एसएसपी