इलाहाबाद। नया ज्ञानोदय के पूर्व संपादक और प्रख्यात कथाकार रवींद्र कालिया नहीं रहे। शनिवार को दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में दिन में 2.50 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। वह तकरीबन 76 वर्ष के थे। लीवर में इंफेक्शन और दर्द की शिकायत पर उन्हें चार जनवरी को दोपहर में अस्पताल में आईसीयू में भर्ती कराया गया जहां उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई थी। डॉक्टरों के मुताबिक उनके लीवर ने काम करना बंद कर दिया था और उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था। अगले दिन स्थिति में मामूली सुधार हुआ, उन्हें वेंटीलेटर से अलग कर दिया गया। शुक्रवार को उनकी स्थिति फिर बिगड़ने पर उन्हें दोबारा वेंटीलेटर पर रखा गया लेकिन शनिवार को डॉक्टरों ने जवाब दे दिया।
बता दें तकरीबन चार वर्ष पहले लीवर में कैंसर की शिकायत पर उनका इलाज शुरू हुआ था लेकिन इलाज के बाद वह स्वस्थ हो गए थे। उनके निधन की खबर से साहित्यिक जगत शोकाकुल है। उनके बेटे प्रबुद्ध कालिया के मुताबिक अंतिम दर्शन के लिए उनका पार्थिव शरीर रविवार की सुबह गाजियाबाद स्थित आवास पर ले जाया जाएगा। यहां से दोपहर बारह बजे शवयात्रा नई दिल्ली के लोदी रोड स्थित श्मशान घाट के लिए जाएगी। जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। जाने-माने कहानीकार, उपन्यासकार और संस्मरण लेखक रवींद्र कालिया की ख्याति एक संपादक के रूप में भी थी। उन्होंने वागर्थ, नया ज्ञानोदय जैसी पत्रिकाओं को नए आयाम दिए।