शासन के नियम-कायदे ही बता रहे हैं कि शाही में सैकड़ों लोगों के राशन कार्ड नहीं बने हैं। इन लोगों ने बाकायदा ऑनलाइन आवेदन भी किया हुआ है, लेकिन फिर भी उनके राशन कार्ड नहीं बनाए जा रहे हैं। शासन के नियमों के मुताबिक शहरी क्षेत्र में 64 और ग्रामीण क्षेत्र में 79 फीसदी परिवारों के राशन कार्ड बनाए जा सकते हैं। इस हिसाब से शाही की 16950 लोगों की कुल आबादी में से 10848 लोग इस योजना का लाभ लेने की हकदार हैं, लेकिन शाही 1895 राशन कार्ड के जरिये में सिर्फ 8742 आबादी को ही खाद्यान्न योजना का लाभ मिल रहा है।
शासनादेश के अनुसार 2106 लोगों को और योजना का लाभ दिया जा सकता है यानी करीब 400 राशन कार्ड और बनाए जा सकते हैं। लतीफ मियां की मौत पर राशन कार्ड का मुद्दा गरमाने पर नगर पंचायत में 386 लोगों ने ऑनलाइन आवेदन भी किए लेकिन उन्हें सत्यापन रिपोर्ट लगाए बगैर ही मीरगंज के सप्लाई दफ्तर भेज दिया गया। साफ जाहिर है कि नगर पंचायत प्रशासन नए राशन कार्ड बनाने को तैयार ही नहीं है। अधिशासी अधिकारी सूर्यनाथ सरोज भी इस मुद्दे पर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। चर्चा यह है कि शाही क्षेत्र के कोटेदारों को वीआईपी कोटे के लिए अच्छा-खासा राशन भरना पड़ रहा है। इसके साथ नगर पंचायत के चुनाव की राजनीति भी गरीबों पर भारी पड़ रही है। इसी कारण उनके राशन कार्ड नहीं बन पा रहे हैं।