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राशन घोटला : साहब भी जानते हैं.. अगर पूरी हो गई जांच तो अपनों पर ही आएगी आंच

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शाही के लतीफ मियां ने डीएम के सामने खड़े होकर चुनौती दी थी कि वह भूख से तड़प-तड़पकर नहीं मरना चाहते, इसलिए उन्हें या तो राशन कार्ड दिला दिया जाए वर्ना गोली मार दी जाए। लतीफ मियां की यह चुनौती स्वीकार नहीं हुई और राशन कार्ड भी नहीं मिला। आठ महीने बाद लतीफ मियां जब जन्नतनशीन हुए तो जिम्मेदार अपनी रिपोर्ट में उन्हें अच्छी-खासी माली हैसियत का आदमी बताकर बरी हो गए। अब और कई ऐसे लोग हैं जो लतीफ मियां की तरह भूख के साथ सिस्टम से भी महीनों से लड़ रहे हैं। अफसर इन पर भी नहीं पसीज रहे हैं। योगी जी के जनता दरबार तक घूमकर आई उनकी फरियाद को भी रद्दी की टोकरी दिखा दी गई। घोटालेबाजों के हौसले इससे और बुलंद हो गए हैं।
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योगी जी! इन गरीबों की कौन सुनेगा

केस-1
गांधी नगर वार्ड की भूमिहीन कृष्णा देवी अपने एक बेटे गुलशन के साथ फूस से बनी झोंपड़ी में रहती हैं। मां-बेटा दोनों मजदूरी करते हैं। जब कभी मजदूरी नहीं मिलती तो घर में चूल्हा भी नहीं जल पाता। राशन कार्ड के लिए पहले दो बार आवेदन किया था। हाल ही में लतीफ मियां की मौत के बाद 21 जून को तीसरी बार आवेदन किया लेकिन राशन कार्ड फिर भी नहीं बना।

केस- 2
गांधी नगर वार्ड की ही सोनू देवी के पति विजय पाल फेरी लगाते हैं। लेकिन यह उनकी कमाई की स्थाई जरिया नहीं है। कभी-कभी उनकी बोहनी तक नहीं हो पाती। नतीजा यह होता है कि कई बार दो साल के बेटे के साथ पति-पत्नी को भूखा सोना पड़ता है। परिवार मिट्टी के कच्चे घर में रहता है। सोनू देवी भी राशन कार्ड के लिए तीन बार आवेदन कर चुकी हैं लेकिन राशन कार्ड अब तक नहीं बना।
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केस- 3
गांधीनगर वार्ड की सुनीता देवी के पति की चार साल पहले मौत हो चुकी है। टूटा-फूटा कच्चा घर है जिसमें दरवाजा तक नहीं है। दो बेटे दीपक और गौरव हैं और दोनों मजदूरी करते हैं। इसी से बमुश्किल सुनीता का परिवार चलता है। सुनीता बताती हैं कि वह दो बार नगर पंचायत में अपना राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन कर चुकी हैं लेकिन न राशन कार्ड बना न किसी ने कोई जवाब दिया।

केस-4
रामवती के भी पति की मौत हो चुकी है। अपने कच्चे घर पर पन्नी डालकर दो बेटे सुरेंद्र और शिवम के साथ रहती हैं। परिवार मजदूरी करता है। इन्होंने पांच महीने पहले नगर पंचायत कार्यालय में राशन कार्ड के लिए आवेदन जमा किया था। राशन कार्ड आज तक नहीं बना है।

केस 5
प्रवेश कुमारी के पति राकेश दर्जी का काम करते हैं। तीन बेटे और दो बेटियों सहित सात लोगों का बड़ा परिवार है। तीन साल पहले उनके पास राशन कार्ड था जिसे अचानक निरस्त कर दिया गया। तब से अब तक सरकारी राशन से महरूम है। पूरा घर टूटा-फूटा और जर्जर है। प्रवेश कुमार ने भी तीसरी बार 22 जून को ऑनलाइन आवेदन किया लेकिन राशन कार्ड नहीं बन सका है।

साहब कैसे करा दें जांच.. सारा खेल तो पहले से पता है
शाही। राशन कार्ड बनाने में बड़े पैमाने पर हुए खेल की जांच ही नहीं हो पा रही है। एसडीएम, डीएम और कमिश्नर से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक से जारी हुए जांच के आदेश अब तक धूल फांक रहे हैं। कोई यह तक सुध लेने को तैयार नहीं है कि जांच के आदेश का हश्र क्या हुआ।
मीरगंज तहसील के ज्यादातर इलाकों में गरीब लोगों की शिकायत है कि सिस्टम ने उनके बजाय साधन संपन्न लोगों के हाथों में राशन कार्ड थमा दिए हैं। लतीफ मियां की मौत के बाद सिस्टम की इस हेराफेरी पर लोगों का गुस्सा भड़का तो कुछ लोग उनकी अगुवाई के लिए भी आगे आ गए। धरना-प्रदर्शन शुरू हुआ तो अफसरों ने पूरी ताकत आंदोलन करने वालों को मैनेजर विरोध को शांत करने में लगा दी और किसी तरह आंदोलन को खत्म भी करा दिया। इसके बाद राशन कार्ड के मामले में आए जांच के सारे आदेश भी दबा दिए गए।

एसडीएम के आदेश पर डेढ़ महीने बाद भी नहीं शुरू हुई जांच
तत्कालीन एसडीएम रोहित यादव ने 11 जून को पूर्ति निरीक्षक और शाही नगर पंचायत कार्यालय को एक सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश जारी किए, लेकिन आदेश कई हफ्तों तक तो तहसील कार्यालय में ही धूल फांकता रहा। बाद में जब रिसीव हुआ तो जांच शुरू करने को लेकर बहानेबाजी शुरू हो गई। लेखपालों ने किसान सम्मान निधि योजना के कार्य में व्यस्त होने का हवाला देकर सत्यापन करने से हाथ खड़े दिए। वहीं नगर पंचायत ने कार्डों की संख्या अधिक होने की बात कहकर इसमें समय लगने की बात कहते हुए हाथ खड़े कर दिए। जांच अब ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है।

खजुरिया की करनी थी जांच भेज दी शाही की जांच रिपोर्ट
खजुरिया गांव में तमाम अपात्रों के राशन कार्ड बने होने की शिकायत छह जून को डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह से की गई थी। डीएम के आदेश पर डीएसओ ने पूर्ति कार्यालय मीरगंज से जांच कर आख्या देने को कहा था। पूर्ति विभाग के लोगों ने खजूरिया में जांच करने के बजाय शाही की जांच रिपोर्ट भेजकर शिकायत का निस्तारण कर दिया। पोर्टल पर की गई गलत एंट्री पर भी किसी ने कोई सवाल नहीं उठाया। इससे साफ हो गया कि अधिकारी भी यही चाहते हैं कि राशन की हेराफेरी पर किसी भी तरह पर्दा पड़ा रहे।

मुख्यमंत्री का आदेश भी हवा में उड़ा दिया
शाही में तमाम अमीरों के राशन कार्ड बना दिए जाने की शिकायत योगेश शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके जनता दरबार में की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय से जिला प्रशासन को जांच का आदेश जारी हुआ लेकिन फिर भी जांच नहीं हुई। तीन जुलाई को योगेश शर्मा ने फिर मुख्यमंत्री के जनता दरबार में शिकायत कर बरेली के अधिकारियों पर जांच को दबाने का आरोप लगाया। इस पर दोबारा जांच का आदेश दिया गया, लेकिन इस आदेश पर भी जांच अब तक शुरू नहीं हो पाई है।
पात्र और अपात्रों का सर्वे करके सूची देने का आदेश मुझे दिया गया है। अभी किसान सम्मान निधि के फार्म फीडिंग का काम चल रहा है इसलिए राशन कार्डों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है। सात अगस्त के बाद जांच कराकर एसडीएम को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। - यशवीर सिंह, जांच अधिकारी, शाही
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