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Prayagraj : 30 साल बाद अधिकमास में सोमवती अमावस्या का महासंयोग, पूजा अर्चना का मिलेगा कई गुना फल

Thu, 11 Jun 2026 05:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इस बार ज्येष्ठ (अधिक) मास की अमावस्या तिथि पर दुर्लभ और पवित्र संयोग बनेगा। अतरसुइया स्थित प्राचीन शिव मंदिर के मुख्य पुजारी पं. धीरज पांडेय के अनुसार, 29 वर्ष 11 महीने (करीब 30 साल) बाद अधिकमास के अंतर्गत सोमवती अमावस्या (15 जून) का यह महासंयोग आया है।
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पुरुषोत्तम मास में पूजन का फल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इस बार ज्येष्ठ (अधिक) मास की अमावस्या तिथि पर दुर्लभ और पवित्र संयोग बनेगा। अतरसुइया स्थित प्राचीन शिव मंदिर के मुख्य पुजारी पं. धीरज पांडेय के अनुसार, 29 वर्ष 11 महीने (करीब 30 साल) बाद अधिकमास के अंतर्गत सोमवती अमावस्या (15 जून) का यह महासंयोग आया है।

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इससे पहले ऐसा ही एक संयोग आषाढ़ मास के अधिकमास के दौरान 15 जुलाई 1996 को पड़ा था। पं. पांडेय ने बताया कि इस विशिष्ट योग में पूजा-अर्चना करने का फल कई गुना बढ़ जाता है। पूजन अमृत काल मुहूर्त सुबह 06:15 बजे से 07:55 बजे और सुबह नौ बजे से दोपहर 12:20 बजे तक (पीपल परिक्रमा का) विशेष मुहूर्त माना गया है। इस दिन संगम में स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और पितरों को मोक्ष मिलता है। उधर, संगम पर स्नान-दान के लिए प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों ने तैयारी शुरू कर दी है। 

15 जून 2026 को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या, अधिक मास के पावन अवसर पर होने के कारण, अपने आप में एक विशेष महत्व रखती है। इस दिन किए गए दान-पुण्य का अक्षय फल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पीपल वृक्ष की पूजा करने और उसके चारों ओर परिक्रमा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है और दांपत्य जीवन सुखमय रहता है। इसके अलावा, इस दिन शिव मंदिरों में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और ग्रह बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

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पूजा-अर्चना और उपाय
इस दुर्लभ योग के अवसर पर भक्त कई तरह के उपाय कर सकते हैं:

पितरों के लिए: अमावस्या तिथि पर पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करना अत्यंत लाभकारी होता है।
भगवान शिव की आराधना: शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद आदि चढ़ाकर 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें।
पीपल वृक्ष की पूजा: पीपल वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें और उसके चारों ओर सात बार परिक्रमा करें।
दान-पुण्य: गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।
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