हनुमत निकेतन स्थित शिवालय में दर्शन पूजन करते भक्त।
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सावन की पुण्यदायी त्रयोदशी 15 जुलाई को है। इस बार त्रयोदशी ध्रुव और वृद्धि महायोग में होगी। मृगशिरा नक्षत्र इस दुर्लभ संयोग में इसका महात्म्य और भी बढ़ गया है। शनिवार को सुबह से ही पुण्य संयोग में भक्तों की भीड़ शिवालयों में जुटने लगी थी। हर हर महादेव और बोल बम के उद्घोष के साथ भक्तों ने देवाधिदेव महादेव का जलाभिषेक और पूजन किया। आचार्यों के अनुसार इस त्रयोदशी पर बाबा का जलाभिषेक खुशहाली लाने वाला होगा। महादेव के दर्शन -पूजन से इस तिथि पर हर तरह के संकटों से मुक्ति भी मिल सकेगी।
सावन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी रविवार की सुबह आरंभ होगी। रात 8:32 बजे तक त्रयोदशी है। ऐसे में जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त रविवार को दिन भर रहेगा। रविवार की रात 8:33 बजे से चतुर्दशी लग रही है। इसी के साथ सोमवार भी लग जाएगा। ऐसे में दो दिन लगातार जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त भक्तों को मिलेगा। ज्योतिषाचार्य पं. ब्रजेंद्र मिश्र के मुताबिक पंचामृत स्नान के साथ ही गन्ना, आम के रस से भोलेनाथ का अभिषेक विशेष फलदायी होगा।
यमुना तट पर स्थित पौराणिक मनकामेश्वर मंदिर, कोटेश्वर महादेव, पड़िला महादेव मंदिर, बड़े हनुमान मंदिर, नागवासुकि मंदिर, दरियाबाद में तक्षकेश्वर शिव मंदिर, अरैल में सोमेश्वर महादेव मंदिर, शिव कुटी में शिव कचहरी, कमौरी नाथ महादेव मंदिर आदि शिवालयों में दूध, फल, गंगा जल, अक्षत, दही, पंचामृत, बेलपत्र, सुगंधित पुष्प आदि से भगवान शिव की पूजा अर्चना की गई।