मांडा थाने में 31 जुलाई 2022 को आवेदक पर दुष्कर्म, पाॅक्सो सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप था कि उसने पीड़िता से शादी का वादा कर संबंध बनाया। जब वह गर्भवती हो गई तो उसने शादी करने से इन्कार कर दिया। आवेदक डेढ़ साल से जेल में है। उसने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया है। पीड़िता के अनुसार आवेदक बच्चे का पिता है। इस पर आवेदक ने कहा, पीड़िता की पहले किसी अन्य व्यक्ति भी शादी हुई थी। वह बच्चे का पिता नहीं है। डीएनए जांच में यदि बच्चा उसका पाया जाता है तो वह उसे व पीड़िता को अपना लेगा। इन तथ्यों के आधार पर आवेदक को जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन की पीठ ने प्रयागराज के थाना मांडा के आरोपी की जमानत अर्जी पर दिया।
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मांडा थाने में 31 जुलाई 2022 को आवेदक पर दुष्कर्म, पाॅक्सो सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप था कि उसने पीड़िता से शादी का वादा कर संबंध बनाया। जब वह गर्भवती हो गई तो उसने शादी करने से इन्कार कर दिया। आवेदक डेढ़ साल से जेल में है। उसने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की।
वकील ने दलील दी कि आवेदक को झूठे आरोप के आधार पर आरोपी बनाया गया है। एफआईआर जब दर्ज कराई गई तो पीड़िता की उम्र 17 साल 10 महीने थी। यानी वह वयस्क होने की कगार पर थी। पीड़िता के बयानों से पता चलता है कि उसकी सहमति से संबंध बने हैं। पीड़िता की मां के बयान से यह पता चलता है कि उसकी शादी पहले किसी अन्य व्यक्ति के साथ हुई थी। डीएनए जांच में बच्चा आवेदक का पाया गया तो वह उसे अपना लेगा। न्यायालय ने इन तथ्यों का संज्ञान लेते हुए आरोपी की सशर्त जमानत अर्जी मंजूर कर ली।