इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी को जमानत दे दी है। कोर्ट ने यह फैसला आरोपी और पीड़िता के बीच शादी होने और उन्हें एक बच्चा होने को ध्यान में रखते हुए दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा की एकल पीठ ने फिरोजाबाद निवासी की अपील पर दिया। अपीलकर्ता को फिरोजाबाद के ट्रायल कोर्ट ने 23 दिसंबर 2024 को नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराते हुए 20 साल की सजा और 30 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया था। इस आदेश को उसने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए अपील दाखिल की।
अधिवक्ता ने दलील दी कि ट्रायल के दौरान अपीलकर्ता ने पीड़िता से शादी कर ली थी, उन्हें एक बच्चा भी है। ट्रायल कोर्ट ने सजा सुनाते हुए इस तथ्य को नजरअंदाज किया है। अपीलकर्ता जेल में है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया, जिनमें आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को इस आधार पर रद्द कर दिया था कि उन्होंने पीड़िता से शादी कर ली थी।
राज्य के वकील ने इसका विरोध किया। कहा, पीड़िता से शादी करने से अपराध खत्म नहीं हो जाता है। यह समाज के खिलाफ एक अपराध है और अनैतिक है। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने अपीलकर्ता से शादी कर ली है। दोनों से एक बेटा है और वह सुखी परिवार के रूप में एक साथ रह रहे हैं। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का संज्ञान लेते हुए अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा करने की अनुमति दे दी।