घाट पर करीब 65 साल से पुरोहित का कार्य करने वाले शांता प्रसाद त्रिपाठी बताते हैं इस गंगा घाट का विशेष महत्व है। यहां पर भगवान ने गंगा उस पार किया था और यहीं से उन्होंने सुमंत को रथ समेत अयोध्या वापस जाने के लिए कहा था।
घाट पर स्नान करने के बाद माथे पर और सीने में राम नाम छपवाने वालों की संख्या काफी अधिक बढ़ गई है। यह धर्म का नशा है जब चढ़ जाता है तो फिर उतरता नहीं है। पूरा देश राममय है। यह सौभाग्य की बात है कि हम लोग रामलला को विराजमान होते हुए देख रहे हैं।