शिक्षा के मामले में अव्वल
इस गांव की तरीबन 60 फीसदी आबादी के लोग शिक्षक हैं। बाकी 20 फीसदी आबादी में मिलिट्री और पैरामिलिट्री में लोग अपने सेवाएं दे रहे हैं। तुलसीराम त्रिपाठी के मुताबिक यहां अयोध्या अपने शाब्दिक अर्थ को चरितार्थ कर रहा है। जिस रियासत में यह गांव आता था, उसके द्वारा नामकरण हुआ था, ऐसा पूर्वजों ने बताया था।
योधम न सत्यत्ते से अयोध्या अर्थात जिसे युद्ध में जीता न जा सके, वह अयोध्या है। यहां पर हर व्यक्ति के नाम देवी-देवता के नाम पर हैं। नाम पर किसी का विशेषाधिकार नही है। प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन यहां पर दीपोत्सव व हवन, पूजन-पाठ होगा। - मणिराम शुक्ल, ग्राम प्रधान, अयोध्या, कोरांव, प्रयागराज