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यहां पेड़ के नीचे श्री राम ने लक्ष्मण व सीता के साथ गुजारी थी रात, निषादराज ने दिया था पहरा

Sun, 10 Nov 2019 05:19 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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राम, सीता और लक्ष्मण - फोटो : a
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तीर्थों के राजा प्रयागराज से भगवान राम का गहरा नाता रहा है। कैकेयी ने जब राजा दशरथ से राम को वनवास और भरत को राजपाट का वरदान मांगा था, तब राम ने वन गमन की यात्रा इसी संगम से शृंगवेरपुर होते हुए चित्रकूट तक की थी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से ‘संगम से शृंगवेरपुर तक का पुरातात्विक सर्वेक्षण’ विषय पर किए गए अध्ययन में इस राम वन गमन पथ की खोज की गई है।

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध ईश्वर शरण पीजी कॉलेज के पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों ने इस राम वन गमन परिपथ परियोजना पर काम किया है। इस परियोजना के निदेशक डॉ. आनंद शंकर सिंह व उप निदेशक डॉ. जमील अहमद के निर्देशन में विशेषज्ञों ने राम वन गमन पथ की खोज की है। इस टीम ने राम परिपथ से जुड़े कई पुरातात्विक स्थलों का पता लगाया है। इसके लिए 70 स्थानों पर खुदाई भी कराई गई। 

इस पुरातात्विक अध्ययन के अनुसार भगवान राम अयोध्या से सीधे मौजूदा प्रयागराज-प्रतापगढ़ की सीमा पर स्थित शृंगवेरपुर पहुंचे थे। वहां उनकी मुलाकात निषादराज से हुई थी। इस स्थल पर निषादराज से भगवान राम के मिलन के प्रमाण रामायण व अन्य धर्मग्रंथों में भी मिलते हैं। 
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रिपोर्ट के मुताबिक निषादराज ने तब भगवान राम से अपने महल में एक रात प्रवास करने का आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने तापस वेश में यहां से दो किमी दूर स्थित रामचौरा में जाकर एक वृक्ष के नीचे लक्ष्मण व सीता के साथ रात गुजारी थी। तब निषादराज ने अपनी सेना के साथ वहां पहरा दिया था।

यहां से आगे भगवान राम कोरई घाट पर दूसरा पड़ाव डाला था। यहां से आगे मौजूदा कौशांबी में भी एक रात राम ने बिताई थी। इसके बाद वह संगम स्थित भरद्वाज मुनि के आश्रम पहुंचे थे। यहां से यमुना पार कर भगवान राम, सीता व लक्ष्मण 150 किमी दूर चित्रकूट गए थे, जहां वनवास के सर्वाधिक 11 वर्ष तक उन्होंने प्रवास किया था।

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