गवाह का किया गया था अपहरण
बाहुबली अतीक अहमद व अन्य के खिलाफ विधायक राजू पाल की हत्या केस की सुनवाई के दौरान चश्मदीद गवाह उमेश पाल का अपहरण किया गया और अतीक के गुर्गों की ओर से अपने पक्ष में बयान देने का दबाव डाला गया, साथ ही धमकी भी दी गई। डर से बयान दर्ज कराया। प्रदेश में सरकार बदलते ही सुरक्षा खतरा कम होने पर याची ने अपहरण धमकी एवं पक्ष में बयान दर्ज कराने के आरोप में अतीक अहमद तथा अन्य के खिलाफ प्रयागराज के धूमनगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई।
पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और विशेष अदालत ने संज्ञान लेकर चार्ज निर्मित किया। विचारण चल रहा है। दोनों पक्षों के साक्ष्य समाप्त हो गए। इसके बाद विपक्षियों ने याची की फिर से प्रति परीक्षा की अनुमति मांगी। ऐसी अर्जी दो बार अदालत की ओर से निरस्त कर दी गई। सह अभियुक्त जावेद ने धारा 482 में याचिका दायर कर दो गवाहों की प्रति परीक्षा की मांग की, जो खारिज हो गई।
पुन: गवाही का आदेश देना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग
इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, किंतु उसे वापस ले लिया गया। बचाव पक्ष की तरफ से कुल 50 गवाह पेश किए गए हैं। इसके बाद आठ दिसंबर 19 को दाखिल अर्जी को स्वीकार करते हुए अदालत ने दो गवाहों की प्रति परीक्षा की अनुमति दे दी, जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी। याची का कहना था गवाही समाप्त हो चुकी है। अंतिम बहस की तिथि तय है। ऐसे में फिर से गवाहों की प्रति परीक्षा की अनुमति देना सही नहीं है। यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए दोनों केसों का ट्रायल दो माह में पूरा कर फैसला सुनाने का निर्देश दिया है।