अपने परिवार के सदस्यों के साथ राजू चौहान।
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करीब 21 वर्ष पहले अपने परिवार से बिछड़ चुके मध्य प्रदेश निवासी 49 वर्षीय राजू चौहान जब शुक्रवार को प्रयागराज के मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय में अपने परिवार से मिले तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वहीं अपने छोटे भाई को देखकर बड़े भाई मुकेश चौहान की आंखें भी नम हो गईं। बिछड़ों को मिलाने का काम होप फुल शेल्टर फाउंडेशन ने किया।
दरअसल, मध्य प्रदेश के पाटलावाद निवासी राजू चौहान मानसिक रोगी हैं और 21 साल पहले उज्जैन से लापता हो गए थे। जिसके बाद बड़े भाई मुकेश व छोटे भाई दिनेश सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने उन्हें खोजने का बहुत प्रयास किया गया। इस दौरान पाटलावाद थाने में इसकी सूचना भी दी गई, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। वहीं चार सितंबर 2025 को राजू चौहान इलाहाबाद जंक्शन के बाद कॉल्विन अस्पताल के कर्मचारियों को खराब स्थित में मिले। इस दौरान इनके बाएं हाथ की एक उंगली बुरी तरह से चोटिल थी।
मरीज को अस्पताल में भर्ती करके उपचार किया गया। जिसके चलते मरीज की खराब हो चुकी उंगली को भी काटना पड़ा। वहीं जब कुछ दिन बाद मरीज को होश आया, तो उसने एक कागज में अपना ठिकाना मध्य प्रदेश बताया। इसके अलावा वह अपनी बड़ी बेटी को नाम पुकारने लगा। जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने होप फुल शेल्टर फाउंडेशन से सपंर्क करके मरीज को परिजनों से मिलाने की बात कही। वहीं फाउंडेशन के संस्थापक गौरव वलेचा और अतुल ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को ट्यूटर पर जानकारी देते हुए पाटलावाद थाने पुलिस और साइबर सेल से संपर्क किया। जिसके बाद परिजनों को राजू के कॉल्विन अस्पताल में होने की जानकारी मिली। वहीं शुक्रवार की सुबह बड़े भाई मुकेश सहित अन्य परिजन राजू को लेने अस्पताल पहुंचे।
घर की कलह से बना मानसिक रोगी
राजू की दो बेटियां हैं। इनमें एक की शादी हो गई और दूसरी पढ़ रही है। राजू की अपनी पत्नी से नहीं बनती थी। जिसके चलते दोनाें में झगड़ा होता था। इन्हीं सबके चलते राजू मानसिक रोगी हो गया। इस बीच परिजनों ने राजू काफी जगह इलाज कराया। वहीं पत्नी भी अपनी दोनों बेटियों के साथ अलग हो गई। इस दौरान उज्जैन में इलाज कराने आए राजू अचानक लापता हो गए।
हमारे अस्पताल में लावारिसों के लिए अलग से छह बेड की व्यवस्था है। हमारी कोशिश रहती है, कि मरीज का उपचार करके उन्हें परिजनों से मिलाया जा सके। आज राजू की लंबे इंतजार के बाद अपने परिजनों से भेंट हुई है। यह काफी खुशी की बात है। - डॉ. एसके चौधरी, प्रमुख अधीक्षक, कॉल्विन अस्पताल।