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जब ‘राजा मांडा’ बोले, हमहुं कुछ हलुक पड़ब

Tue, 26 Mar 2019 01:32 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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vp singh - फोटो : vp singh
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इंदिरा गांधी की 1984 में हत्या के बाद कांग्रेस के पक्ष में देश भर में उभरी सहानुभूति की लहर और राजीव गांधी के युवा नेतृत्व से उपजी नई उम्मीद के बीच हो रहे लोक सभा चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार के रूप में कद्दावर नेता हेमवती नंदन बहुगुणा चुनाव मैदान में पहले से ही आ चुके थे। राजीव गांधी ने इस चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विश्वनाथ प्रताप सिंह ‘राजा मांडा’ से बहुगुणा के खिलाफ चुनाव लड़ने को कहा तो उन्होंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। इसके बाद राजीव गांधी ने अमिताभ बच्चन को कांग्रेस का प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा।
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इलाहाबाद जैसे महत्वपूर्ण लोकसभा क्षेत्र के लिए प्रत्याशी चुने जाने के दौरान जब तत्कालीन प्रधानमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव गांधी ने उस समय के उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रताप सिंह और इलाहाबाद के तत्कालीन सांसद केपी तिवारी से बहुगुणा के सामने चुनाव की परिस्थिति पर चर्चा की तो इन दोनों नेताओं ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। वीपी सिंह और केपी तिवारी की ओर से चुनाव लड़ने से मना करने के घटनाक्रम को उस समय संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार हेमवती नंदन बहुगुणा ने मेजा के सिरसा बाजार में आयोजित एक जनसभा में बयां किया था। उस समय बहुगुणा के चुनाव का प्रबंधन देख रहे लखनपुर के वीरेंद्र नाथ तिवारी बताया कि चुनाव में बहुगुणा बोले-
 ‘राजीव गांधी ने जब केपी तिवारी से चुनाव लड़ने के लिए कहा तो केपी बोले कि हम बहुगुणा के आगे पसंघा भी पड़ब, तब राजीव गांधी राजा मांडा वीपी सिंह से बोले कि राजा तू लड़ी जा। इस बात पर राजा बोलेे, कि हमहूं कुछ हलुक पड़ब। तब हमरे खिलाफ भेजे हैं नचनिया (हीरो)।’’
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बहुगुणा के भाषण की ओर से 1984 में सिरसा में दिए भाषण का अंदाज आज भी उस समय सभा में मौजूद सिरसा बाजार के व्यापारी एवं श्री राम प्रताप इंटर कॉलेज के शिक्षकों के जेहन में ताजा है। उस समय राम प्रताप इंटर कॉलेज के छात्र रहे ओम प्रकाश दुबे, प्रवीण कुमार को बहुगुणा का वह वह भाषण याद है।

राजीव के दोस्तों ने सुझाया था अमिताभ का नाम
उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि के पूर्व परामर्शदाता डॉ. हरीश चंद्र जायसवाल का कहना है कि राजीव गांधी के लिए इलाहाबाद सीट जीतना उनके लिए प्रतिष्ठा की बात थी। इस बीच अमिताभ का नाम उनके कुछ दोस्तों से सुझाया। अमिताभ और राजीव में गहरी दोस्ती थी। राजीव ने जब अमिताभ को इलाहाबाद से चुनाव लड़ने के लिए कहा तो वे मना नहीं कर पाए। वीपी सिंह ने अपने संस्मरण पर आधारित एक पुस्तक ‘मंजिलों से ज्यादा सफर’ में भी लिखा है कि राजीव गांधी चुनाव में अमिताभ की लोकप्रियता को भुनाना चाहते थे, जिसमें वे सफल रहे थे।
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