कोविड-19 की वजह से करोड़ों रुपये का नुकसान झेल चुका रेलवे अब अपनी पुरानी लय पाने की कोशिश में जुट गया है। बीते तीन माह के दौरान हुए घाटे की भरपाई करने के लिए रेलवे ने अपनी कुछ पैसेंजर ट्रेनों को एक्सप्रेस ट्रेन के रूप में तब्दील करने की तैयारी में है। इसमें उन पैसेंजर ट्रेनों का चयन किया जाएगा जो 200 किमी से ज्यादा का सफर तय करती है। पैसेंजर ट्रेनों को एक्सप्रेस ट्रेनों में तब्दील करने से जहां टिकट बेचने से रेलवे की आय में वृद्धि होगी तो वहीं यात्री भी अपने गंतव्य तक जल्दी पहुंच जाएंगे।
प्रयागराज से संचालित विभिन्न पैसेंजर ट्रेनों की बात करें तो 200 किमी से ज्यादा की दूरी का सफर छिवकी-इटारसी, प्रयागराज-झांसी, प्रयागराज-बरेली, प्रयागघाट-लखनऊ, प्रयागराज रामबाग-मऊ, प्रयागघाट-गाजीपुर डीएमयू, प्रयागराज-फर्रुखाबाद पैसेंजर प्रमुख रूप से शामिल है। पैसेंजर होने की वजह से इन सभी ट्रेनों का किराया काफी कम है। रेलवे अफसरों का कहना है कि पैसेंजर को एक्सप्रेस बनाने से जहां उसकी एक ओर रफ्तार बढ़ जाएगी तो वहीं यात्री एक से दूसरे स्टेशन के बीच जल्दी पहुंचेंगे।
ट्रेनों को एक्सप्रेस बनाने से उसमें एक्सप्रेस श्रेणी का किराया लगेगा। जो पैसेंजर श्रेणी की तुलना से प्रति यात्री ज्यादा रहेगा। ऐसे में हर एक यात्री तो 20 से 60 रुपये किराये के रूप में ज्यादा चुकाने होंगे। हालांकि रेलवे अगर यह निर्णय लेता है तो सीधे तौर पर उन यात्रियों को नुकसान होगा जो छोटे स्टेशनों के लिए सफर करते है। क्योंकि अगर पैसेंजर को एक्सप्रेस ट्रेन बनाया जाता है तो कुछ छोटे स्टेशन पर उनका ठहराव खत्म कर दिया जाएगा। चर्चा है कि एक जुलाई से रेलवे कुछ पैसेंजर ट्रेनों का संचालन एक्सप्रेस ट्रेनों के रूप में कर सकता है। इस बारे में डीआरएम प्रयागराज अमिताभ का कहना है कि अभी पैसेंजर ट्रेनों को एक्सप्रेस ट्रेनों के रूप में चलाए जाने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इस पर अभी सिर्फ चर्चा ही हो रही है।