भारतीय रेलवे ने अपने टिकट बुकिंग ढांचे को आधुनिक और अधिक कुशल बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किया है। रेलवे बोर्ड के नए निर्देशों के अनुसार, अब उन नॉन-रेलवे हेडक्वार्टर (एनआरएच) केंद्रों को पीआरएम-कम-यूटीएस टर्मिनल (आरक्षित एवं अनारक्षित टिकट काउंटर) में बदल दिया जाएगा, जहां प्रतिदिन औसतन 25 से कम टिकट बुक होते हैं। विशेष परिस्थितियों में इन काउंटरों को बंद भी किया जा सकता है।
दरअसल, रेलवे स्टेशन के अतिरिक्त अन्य प्रमुख स्थानों पर भी रेलवे के रिजर्वेशन काउंटर बनाए जाते हैं। इन काउंटरों को एनआरएच कहा जाता है। यहां रेलवे का स्टाफ ही ड्यूटी पर रहता है। रेलवे बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में लगभग 87 फीसदी आरक्षित टिकट ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं। ऑनलाइन बुकिंग के प्रति बढ़ते रुझान और रेलवन जैसे डिजिटल विकल्पों की उपलब्धता के कारण भौतिक काउंटरों पर निर्भरता काफी कम हुई है।
इसी वजह से रेलवे अब उन केंद्रों को बंद करने पर भी विचार कर रहा है, जहां ट्रांजैक्शन की संख्या लगातार गिर रही है। ऐसे काउंटर जहां दिन भर में 25 से कम टिकट बुक होते हैं या तो उन्हें बंद किया जाएगा या फिर उसे पीआरएस कम यूटीएस में बदला जाएगा। यानी वहां आरक्षित टिकट के साथ अनारक्षित टिकट भी उपलब्ध होंगे।
रेलवे बोर्ड की ओर से उत्तर मध्य रेलवे समेत सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों को जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इन परिवर्तित पीआरएस-कम-यूटीएस केंद्रों के संचालन के लिए कोई नया रेलवे स्टाफ नहीं दिया जाएगा। वर्तमान में तैनात कर्मचारियों को ही इस नई व्यवस्था के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा।