व्यावसायिक भवनों के बढ़े गृहकर पर नगर निगम सदन की बैठक महापौर ने पार्षदों के दबाव में तो बुला ली, लेकिन कोरम में अभाव में उसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। बैठक में भाग लेने के लिए पहुंचे पार्षदों ने इसे लेकर खूब शोर शराबा किया। पार्षदों ने आरोप लगाया कि निगम प्रशासन चाहता ही नहीं है कि इस मामले को लेकर सदन की बैठक हो। शुक्रवार को बैठक स्थगित होने के बाद सदन में मौजूद पार्षदों ने नारेबाजी की और वे वहीं धरने पर बैठ गए। बाद में पार्षदों ने काफी देर तक मौन उपवास भी किया।
बता दें कि शासन ने संपत्ति कर अधिनियम में 2013 में संशोधन किया। यह उसी दौरान लागू होना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पिछले वर्ष 30 मार्च को कार्यकारिणी बैठक में पार्षदों की मांग पर महापौर ने नगर आयुक्त देवेंद्र कुमार पांडेय को संशोधित अधिनियम लागू करने का निर्देश दिया। इसके बाद निगम प्रशासन ने संशोधित अधिनियम के तहत व्यावसायिक भवनों का सर्वे कराया और बिल जारी किया। बाद में जिन पार्षदों ने संशोधित संपत्ति कर अधिनियम लागू करने पर जोर दिया था, सर्वे और बिल जारी होने के बाद उसमें से ही कुछ इसके विरोध में खड़े हो गए। पिछले माह 28 मार्च को कार्यकारिणी की बजट बैठक में पार्षदों ने यह मुद्दा उठाया सो बजट के बजाए टैक्स पर चर्चा हुई और एक अप्रैल को सदन बुलाने का फैसला हुआ। बैठक दिन में 12 बजे शुरू होनी थी। महापौर, नगर आयुक्त समेत अन्य अफसर सदन में पहुंचे तो वहां सिर्फ 22 पार्षद ही मौजूद रहे।
जबकि कोरम के तहत सदन हॉल में 51 पार्षदों का होना जरूरी था। इसे देखते हुए मेयर ने 15 मिनट के लिए बैठक स्थगित कर दी। 12.30 बजे सदन दुबारा शुरू हुआ तो वहां सिर्फ 34 पार्षद ही रहे। इसे देखते हुए मेयर ने सदन की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। मेयर की इस कार्रवाई से सदन में मौजूद पार्षद भड़क गए। पार्षदों ने कहा कि जुमा होने की वजह से कुछ पार्षद थोड़ी देर में सदन पहुंच जाएंगे। इसलिए बैठक स्थगित न की जाए। मेयर और नगर आयुक्त के सदन हाल से बाहर जाते ही पार्षद भड़क गए। इस दौरान जमकर नारेबाजी हुई। पार्षद शिवसेवक सिंह, अतहर रजा लाडले, सत्येंद्र चोपड़ा, पुष्पा कुशवाहा, गणेश केसरवानी, गिरीशंकर प्रभाकर, रमेश मिश्र, सुशील यादव, किरण जायसवाल, आभा द्विवेदी, भोला तिवारी, विजय पुर्सवानी, पूर्व पार्षद कमलेश सिंह, अवधेश गुप्ता आदि पार्षद वहीं धरने पर बैठ गए। यहां पार्षदों ने आरोप लगाया कि मेयर और नगर आयुक्त ने कुछ पार्षदों को सदन की कार्रवाई में भाग लेने से रोका है। पार्षद शिवसेवक ने बताया कि इसके विरोध में पार्षद तीन बजे तक सदन में मौन उपवास पर रहे। पार्षद गणेश केसरवानी ने कहा कि अनिश्चितकाल के लिए सदन की कार्रवाई स्थगित कर देना लोकतंत्र की हत्या के समान है।