prayagraj news : नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
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उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की मौजूदगी में 15 जिला पंचायत सदस्यों के भाजपा में शामिल होने के दावे पर सपा ने सवाल उठाए हैं। जिलाध्यक्ष योगेश चंद्र यादव ने भाजपा की ओर से जारी सूची को गुमराह करने वाला बताया। उन्होंने दावा किया कि इनमें तीन सदस्य सोमवार को पार्टी कार्यालय पहुंचे और सपा के प्रति पूरी आस्था व्यक्त की। दो अन्य सदस्य भी उनके संपर्क में हैं।
उप मुख्यमंत्री की मौजूदगी में कई जिला पंचायत सदस्यों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। भाजपा की ओर से 15 सदस्यों की सूची भी जारी की गई। इसके विपरीत सपा जिलाध्यक्ष का कहना है कि जिला पंचायत की वार्ड संख्या 41 से विजयी शकुंतला यादव, वार्ड 44 से विष्णु कुमार यादव एवं 45 से जीते रावेंद्र सिंह ने समाजवादी टोपी पहनकर फोटो खिंचवाई और शपथ ली कि वह हमेशा सपा के सिपाही रहेंगे।
उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सपा समर्थित उम्मीदवार को वोट देने और प्रचार करने की बात कही। योगेश यादव ने दावा किया कि अध्यक्ष पद पर सपा समर्थित उम्मीदवार को 60 से अधिक मत मिलेंगे। एमएलसी डॉ.मान सिंह यादव का कहना था कि हार की डर से बौखलाए भाजपाई जोड़तोड़ में जुटे हैं लेकिन उनका मंसूबा पूरा नहीं होगा। पूर्व प्रदेश प्रवक्ता केके श्रीवास्तव, महानगर अध्यक्ष सैयद इफ्तेख़ार हुसैन, नरेंद्र सिंह, दान बहादुर मधुर आदि ने भी भाजपा की सूची पर सवाल उठाए।
सपा एक-दो दिनों में घोषित कर सकती है अध्यक्ष पद का प्रत्याशी
सपा की ओर से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी की घोषणा एक-दो दिन में किए जाने की उम्मीद है। भाजपा की ओर से 15 सदस्यों के समर्थन के बाद सपा के सामने अपने किले को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए विगत 20 वर्षों की लड़ाई को देखें तो सदस्यों की आस्था सूबे में सत्ता परिवर्तन के साथ बदलती रही है। ऐसे में सपा की चिंता और बढ़ गई है। इसलिए अध्यक्ष पद के उम्मीदवार की तलाश तेज कर दी गई है। तोड़फोड़ को रोका जा सके। इस दौड़ में दो नाम काफी आगे बताए जा रहे हैं। इनमें से एक महिला जिला पंचायत सदस्य के पिता सपा में बड़े नेता हैं। इसके अलावा उनके पति बड़े व्यवसायी हैं। वहीं दूसरे दावेदार पार्टी के वरिष्ठ नेता रेवती रमण सिंह के करीबी हैं।
भाजपा की राह अब भी आसान नहीं
15 जिला पंचायत सदस्यों के शामिल होने के बाद भी भाजपा की अध्यक्ष पद पर काबिज होने की राह आसान नहीं दिख रही। पार्टी के 14 समर्थित प्रत्याशी विजयी हुए हैं। 15 लोगों के शामिल होने का पार्टी का दावा सच है तब भी कुल सख्या 29 सदस्य हो पाएंगे। जबकि, अध्यक्ष पद पर जीत के लिए कुल 43 सदस्यों का समर्थन चाहिए।