लॉक डाउन के दौरान आश्रय स्थलों या शेल्टर होम्स में रह रहे क्वारंटीन लोगों को मानसिक तनाव बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अनोखी पहल की है। ऐसे लोगों को मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए अब उनकी काउंसलिंग की जा रही है। उन्हें बताया जा रहा है कि लॉक डाउन के दौरान उनको अपना समय बेहतर तरीके से किस तरह व्यतीत कर सकते हैं।
जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत तैनात साइकेट्रिस्ट, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट और साइकेट्रिक सोशल वर्कर इस कार्य को कर रहे हैं। इस कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. वीके मिश्रा ने बताया कि कोरोना के वायरस से डरने की बचने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि सोमवार को अंबर पैलेस, पहलवान चौराहा एवं महबूबा गेस्ट हाउस, जीटीबी नगर करेली मैं क्वारंटीन लोगों और उनके आश्रितों को मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूक करते हुए तनाव प्रबंधन के गुर सिखाए गए। नैैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. इशान्या राज ने क्वारंटीन लोगों को बताया कि कोरोना के लक्षण छींक, बुखार, खांसी और सांस लेने में दिक्कत आ रही हो तो तुरंत प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दें।
डॉ. इशान्या ने लोगों को बताया कि पालतू जानवरों को साफ. सफ ाई से रखें और उन्हें बाहर न निकलने दें। कोरोना फोबिया से बचने के लिए कोरोना के संबंध में घर पर बार-बार बात नहीं करें। घर पर परिजनों के साथ रचनात्मक कार्य करें। घर को व्यवस्थित करें, व्यायाम करें और खुश रहकर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं।
मनोचिकित्सक डॉ. अजय कुमार मिश्रा ने कहा कि सोशल डिस्टेसिंग के माध्यम से कोरोना को पूरी तरह से हरा सकते हैं। लॉक डाउन में घर पर रहकर अपनी दिनचर्या को व्यस्त रखें। ध्यान, योगा कर, बच्चों के साथ खेलें। टीवीदेखें। ध्यान रखें कि बच्चों के साथ दूरी बने रहे। बच्चे बाहर नहीं निकले। घर- परिवार में सेशल डिस्टेसिंग बनाकर रखें। जरूरत हो तो मानसिक स्वास्थ्य परामर्श हेल्पलाइन नंबर 7318257567 पर टेली.काउंसलिंग के माध्यम से जब चाहें नैदानिक मनोवैज्ञानिक से परामर्श ले सकते हैं।