दो-तीन दिनों से मुंबई, दिल्ली सहित देश के दूसरे प्रदेशों से अपने घरों को लौट रही भीड़ को क्वारंटीन करने के लिए शहर के सात स्थानों पर अस्थाई सेंटर्स बनाए गए है। आनन-फानन में बनाए गए सेंटर्स में महज सवा सौ के आसपास ही लोग क्वारंटीन हैं। जबकि दूसरे प्रांतों से आने वालों की संख्या हजारों में है। 15163 की जानकारी तो स्वास्थ्य विभाग दे रहा है, जिनकी जांच सीएचसी पर चिकित्सकों द्वारा की गई है। जबकि, आने वालों का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा है, जिसका रिकार्ड न तो जिला प्रशासन के पास है और न ही स्वास्थ्य विभाग के पास। जानकारों का मानना है कि ऐसे लोगों की संख्या 25 से 30 हजार से कम नहीं होगी।
शहर में बनाए गए इन क्वारंटीन सेंटर्स की हालत भी डब्ल्यूएचओ के मानक के मुताबिक नहीं है। क्वारंटीन के दौरान व्यक्ति को एक अलग कमरे में रखना होता है। उसमें शौचालय की भी व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन जिला प्रशासन की ओर से बनाए गए अस्थायी क्वारंटीन सेंटर्स में ऐसा कुछ भी नहीं है। प्रशासन ने इन्हें रोक तो लिया है लेकिन संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए हैं। जिन सात सेंटर्स को क्वारंटी बनाया भी गया है, उनमें से तीन सेंटर्स पर ही लोग हैं।
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भीड़ ज्यादा होने पर जिला प्रशासन ने आनन-फानन में केपी इंटर कॉलेज, हैजा अस्पताल, बाघंबरी गद्दी में बने रैन बसेरा, नुरूल्लारोड पर स्टेशन के सामने और लीडररोड पर बस स्टैंड के पास बने रैन बसेरा, यमुना बैंक रोड और मुंडेरा चुंगी पर क्वारंटीन सेंटर्स बना दिए। हालांकि, अभी इन सभी सेंटर्स में से सिर्फ तीन केपी इंटर कॉलेज, अल्लापुर स्थित हैजा अस्पताल और बाघंबरी गद्दी रैन बसेरा में ही लोगों को क्वारंटीन किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां रुके सभी सवा सौ लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण और थर्मल स्क्रीनिंग की गई। कोरोना के नोडल इंचार्ज डॉ. गणेश प्रसाद के मुताबिक इन सेंटर्स में कोई भी कोरोना का संदिग्ध नहीं मिला है।
सिर्फ मरीजों के लिए है आइसोलेशन वार्ड
स्वास्थ्य विभाग अभी तक सिर्फ मरीजों के लिए ही आइसोलेशन वार्ड बनाए हैं। ये आईसोलेशन वार्ड तीन तरह के बनाए गए हैं। ए, बी और सी कटेगरी में बंटे इन वार्डों को मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार रखा जाएगा। संदिग्ध अवस्था में हैं तो उसे एक अलग वार्ड में रखे जाने की व्यवस्था एसआरएन और बेली में की गई है जबकि कोरोना की पुष्टि होने के बाद वेंटिलेटर युक्त आइसोलेशन वार्ड में रखा जाएगा। इसकी व्यवस्था सिर्फ एसआरएन में है। कोरोना मरीज के संपर्क में आने वालों को अलग से आइसोलेशन वार्ड में रखने का इंतजाम एसआरएन, बेली और कोटवां सीएसी पर किया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक इनकी संख्या सात सौ के करीब है।