याची अधिवक्ता प्रांजल शुक्ला ने कहा कि माल रोकने के बाद और अभिग्रहण आदेश पारित होने से पहले दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं, तो अधिनियम की धारा 129(3) के तहत कोई जुर्माना नहीं लगाया जाता तथा अर्थदंड के लिए कर चोरी का इरादा मौजूद होना आवश्यक है।
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रवि शंकर पाण्डेय ने कहा कि 1 अप्रैल 2018 से रूल्स में चौदहवें परिवर्तन के बाद ई-वे बिल तथा अन्य आवश्यक प्रपत्र माल के साथ होना अनिवार्य है। प्रस्तुत मामले में माल के साथ न तो ई-वे बिल था और न ही अन्य आवश्यक प्रपत्र, ऐसे में याचिकाकर्ता पर दस्तावेजों से उसके खंडन का उत्तरदायित्व हो जाता है। कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका निरस्त कर दी कि प्रस्तुत मामले में यह स्पष्ट है कि यदि माल को रोका नहीं गया होता, तो उक्त माल पर देय जीएसटी के संबंध में सरकार को कर का नुकसान हो जाता।