फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट : अर्थदंड का उद्देश्य टैक्स से बचने वालों पर नियंत्रण करना है, अखिलेश ट्रेडर्स की याचिका की खारिज

Sat, 24 Feb 2024 05:57 AM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

वाहन रोके जाने के बाद इनवॉइस और ई-वे बिल प्रस्तुत करने से याची अर्थदंड की कार्रवाई से मुक्त नहीं हो सकता। आगे कहा कि अर्थदंड आरोपित करने का मुख्य उद्देश्य सरकार को टैक्स का भुगतान करने से बचने वालों पर नियंत्रण करना है। यह फैसला न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ की कोर्ट ने सुनाया।
विज्ञापन
अदालत। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभिग्रहण और अर्थदंड आदेश के एक मामले में कहा कि याचिकाकर्ता इनवॉइस और ई-वे बिल की अनुपस्थिति में कर चोरी की धारणा का खंडन करने में सक्षम नहीं है। वाहन रोके जाने के बाद इनवॉइस और ई-वे बिल प्रस्तुत करने से याची अर्थदंड की कार्रवाई से मुक्त नहीं हो सकता। आगे कहा कि अर्थदंड आरोपित करने का मुख्य उद्देश्य सरकार को टैक्स का भुगतान करने से बचने वालों पर नियंत्रण करना है। यह फैसला न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ की कोर्ट ने सुनाया।

विज्ञापन


मामले में अखिलेश ट्रेडर्स के परिवहित किए जा रहे माल को वाहन समेत जांच के लिए जीएसटी विभाग के सचल दल यूनिट प्रयागराज ने रोका था, लेकिन उस समय ई-वे बिल और इनवॉइस मौजूद नहीं था। बाद में ई-वे बिल जनरेट करके इनवॉइस के साथ प्रस्तुत किया गया। वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम 2017 की धारा 129 (3) के तहत जुर्माना लगाया गया। अपर आयुक्त ग्रेड-2 (अपील) के यहां अपील किया गया, लेकिन राहत नहीं मिली। इसके बाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई।

विज्ञापन

याची अधिवक्ता प्रांजल शुक्ला ने कहा कि माल रोकने के बाद और अभिग्रहण आदेश पारित होने से पहले दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं, तो अधिनियम की धारा 129(3) के तहत कोई जुर्माना नहीं लगाया जाता तथा अर्थदंड के लिए कर चोरी का इरादा मौजूद होना आवश्यक है।

उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रवि शंकर पाण्डेय ने कहा कि 1 अप्रैल 2018 से रूल्स में चौदहवें परिवर्तन के बाद ई-वे बिल तथा अन्य आवश्यक प्रपत्र माल के साथ होना अनिवार्य है। प्रस्तुत मामले में माल के साथ न तो ई-वे बिल था और न ही अन्य आवश्यक प्रपत्र, ऐसे में याचिकाकर्ता पर दस्तावेजों से उसके खंडन का उत्तरदायित्व हो जाता है। कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका निरस्त कर दी कि प्रस्तुत मामले में यह स्पष्ट है कि यदि माल को रोका नहीं गया होता, तो उक्त माल पर देय जीएसटी के संबंध में सरकार को कर का नुकसान हो जाता।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें