इलाहाबाद। बिना योग्यता के की जा रही तैनाती के मामले में लोक सेवा आयोग के सचिव रिजवानुलहक का भी नाम शुमार हो गया है। हाईकोर्ट ने उनके सचिव पद पर काम करने पर रोक लगा दी है। प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर सचिव पद पर आईएएस अधिकारी की तैनाती कर दी जाए। कोर्ट ने प्रदेश सरकार से इस मामले में जवाब भी मांगा है। अयोध्या सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र की खंडपीठ ने यह आदेश दिया।
याचिका में लोक सेवा आयोग के सचिव पद पर तैनात रिजवानुलहक की नियुक्ति को चुनौती दी गई है। याची का कहना था कि यह पद आईएएस कैडर का है। रिजवानुलहक आईएएस अधिकारी नहीं है। वह सचिव पद का काम अगस्त 14 से काम कर रहे हैं। वह आयोग में संयुक्त सचिव हैं जबकि इस पद के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित योग्यता आईएएस कैडर का अधिकारी है, जिसे सुपर टाइम स्केल मिल रहा हो। कोर्ट ने इस गंभीरता से लेते हुए कहा कि क्या प्रदेश सरकार को सचिव पद के लिए आईएएस अधिकारी नहीं मिल रहे हैं। कोर्ट ने रिजवानुलहक के सचिव पद पर काम करने से रोक लगाते हुए सरकार को एक सप्ताह के भीतर आईएएस अधिकारी की तैनाती करने का निर्देश दिया है।