पीसीएस-2021 का परिणाम दो मायनों में अप्रत्याशित रहा। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने पहली बार इतने कम समय में परिणाम जारी किया। वहीं, बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सामान्य अध्ययन का द्वितीय प्रश्नपत्र (सीसैट) क्वालीफाई नहीं कर सके। नतीजा कि पदों की संख्या के मुकाबले महज 11 गुना अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किए गए, जबकि मानक 15 गुना का है।
विशेषज्ञों ने पहले ही आशंका जताई थी कि इस बार सीसैट का पेपर उलझाऊ था और ऐसे में अभ्यर्थियों के लिए क्वालीफाई करना पड़ा चुनौती साबित होगी। ‘अमर उजाला’ के 25 अक्तूबर के अंक में इस बारे में खबर प्रकाशित की गई थी।
वहीं, यूपीपीएससी ने हाल ही में निर्णय लिया था कि प्रारंभिक परीक्षा में पदों की संख्या के मुकाबले अब 15 गुना अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए और मुख्य परीक्षा में तीन गुना अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए क्वालीफाई कराया जाएगा। इससे पूर्व क्रमश: 13 गुना एवं दो गुना अभ्यर्थियों को क्वालीफाई कराया जा रहा था।
बुधवार को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी हुआ तो अभ्यर्थियों को तगड़ा झटका लगा। 694 पदों के मुकाबले केवल 7688 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किए गए, जो पदों की संख्या के मुकाबले 11.33 गुना है। वहीं, एसीएफ/आरएफओ के 16 पदों के लिए 296 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए क्वालीफाई कराया गया है, जो आयोग की ओर से निर्धारित मानक के अनुरूप है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का आरोप है कि पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट साफ संकेत दे रहा है कि आयोग अपने ही नियम को नहीं मानता है। प्रशांत ने रिजल्ट में संशोधन की मांग की है।
आयोग का दावा, कई ग्रुपों में 15 गुना अभ्यर्थी पास
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का दावा है कि कई पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में कई ग्रुपों में पदों की संख्या के मुकाबले 15 गुना अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया है। आयोग के सचिव जगदीश के अनुसार क्वालिफिकेशन के आधार पर पीसीएस के पद सात से आठ ग्रुपों में बंटे होते हैं। सभी अभ्यर्थियों को द्वितीय प्रश्नपत्र सीसैट में न्यूनतम 33 फीसदी अंक लाना अनिवार्य है। न्यूनतम अंक पाने पर ही प्रथम प्रश्नपत्र की ओएमआर जांची जाती है।
परिणाम में सीसैट पेपर में मिले अंक नहीं जोड़े जाते हैं। कुछ ग्रुपों में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सीसैट के पेपर में 33 फीसदी अंक प्राप्त नहीं कर सके। इसके अलावा प्रथम प्रश्नपत्र में भी सामान्य और ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 40 फीसदी और एससी एवं एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 35 फीसदी अंक की अनिवार्यता है। यहां भी न्यूनतम अर्हता अंक प्राप्त न कर पाने के कारण कुछ ग्रुपों में अभ्यर्थी छंट गए। वहीं, कई ग्रुपों में पदों की संख्या के मुकाबले 15 गुना या इससे अधिक अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए हैं।