राज्य विश्वविद्यालय के प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशाम्बी और फतेहपुर में 704 संघटक महाविद्यालय हैं। इन दिनों सत्र 2023-24 की सम सेमेस्टर/वार्षिक परीक्षाएं चल रहीं हैं, जिनमें चार लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं। विषम सेमेस्टर की परीक्षाओं में भी तकरीबन इतने ही परीक्षार्थी शामिल होते हैं।
प्रो.राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) राज्य विश्वविद्यालय विषम सेमेस्टर परीक्षा सत्र 2023-24 की कॉपियां नष्ट करने जा रहा है, लेकिन इससे पहले विश्वविद्यालय ने उन अभ्यर्थियों से आवेदन मांग लिए हैं, जो आरटीआई के तहत अपनी कॉपियां देखना चाहते हैं या उनकी उत्तर पुस्तिकाओं से संबंधित कोई वाद न्यायालय में लंबित है।
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राज्य विश्वविद्यालय के प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशाम्बी और फतेहपुर में 704 संघटक महाविद्यालय हैं। इन दिनों सत्र 2023-24 की सम सेमेस्टर/वार्षिक परीक्षाएं चल रहीं हैं, जिनमें चार लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं। विषम सेमेस्टर की परीक्षाओं में भी तकरीबन इतने ही परीक्षार्थी शामिल होते हैं। ऐसे में हर परीक्षा में लाखों की संख्या शामिल परीक्षार्थियों के मुकाबले कई गुना अधिक कॉपियां निकलती हैं।
राज्य विश्वविद्यालय ने 80 लाख कॉपियों को सुरक्षित रखने के लिए वेयर हाउस तैयार किया है। इसमें पिछली परीक्षाओं की 25 लाख कॉपियाें के साथ वर्तमान में चल रही परीक्षाओं की 25 लाख कॉपियों भी रखे जाने की व्यवस्था है। साथ ही भविष्य में आयोजित होने वाली परीक्षाओं के लिए भी 25 लाख कॉपियों को रखा जाना है। जिस परीक्षा को लेकर न्यायालय में वाद लंबित है, उससे संबंधित उत्तर पुस्तिकाएं भी रखी गईं हैं।
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विश्वविद्यालय के पास क्षमता से अधिक कॉपियां इकट्ठा होने पर अब पुरानी परीक्षाओं की कॉपियों को नष्ट किया जाना है, ताकि नई परीक्षाओं की कॉपियों को रखे जाने की जगह बनाई जा सके। इसी के मद्देनजर विश्वविद्यालय प्रशासन विषम सेमेस्टर परीक्षा सत्र 2023-24 की उत्तर पुस्तिकाओं को नष्ट करने जा रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया से पहले परीक्षार्थियों को अपनी कॉपियां देखने का अवसर दिया गया है।
परीक्षार्थियों से कहा गया है कि अगर वे जन सूचना अधिकारी (आरटीआई) के तहत अपनी उत्तर पुस्तिकाओं को देखना चाहते हैं या उनकी उत्तर पुस्तिकाओं से संबंधित कोई वाद न्यायालय में लंबित है तो वे 26 अप्रैल 2024 से पहले विश्वविद्यालय को इसकी सूचना उपलब्ध करा दें, ताकि संबंधित उत्तर पुस्तिकाओं को अलग करते हुए उन्हें संरक्षित किया जा सके।