माहे मुकद्दस रमजान के आखिरी जुमे पर जामा मस्जिद चौक और शिया जामा मस्जिद चक सहित शहर की तमाम इबादतगाहों में खास नमाज अदा की गई। बड़ी संख्या में जुटे नमाजियों ने खुदा की बारगाह में सजदा किया। सुबह से ही अलविदा की नमाज के लिए रोजेदारों में खास उत्साह रहा। नौ बजते ही लोग तैयार होकर मस्जिदों की ओर चल पड़े। जामा मस्जिद चौक पर नमाजियों की बड़ी जमात जुटी। मस्जिद भरी तो ठठेरी बाजार, पुरानी जीटीरोड, कोतवाली के सामने, लोकनाथ, बजाजा पट्टी, लाल डिग्गी, घंटाघर, फल मार्केट तक नमाजियों की कतार लगी।
वहीं शिया जामा मस्जिद चक में इमाम जुमा व जमात मौलाना सैयद हसन रजा ने खुतबे के दौरान नफरत की सियासत से दूर रहने का पैगाम दिया। कहा, आतंकवाद, अलगाववाद घातक है। हमें मुल्क के दुश्मनों से सावधान रहना है, जो हमारे बीच घुल मिलकर रह रहे हैं। हमारे जैसे कपड़े पहनते हैं, हमारी ही बोली में बात करते हैं और हमारे लिए घड़ियाली आंसू बहाकर आपस में लड़ाने के लिए आमादा है। सब्र रखें, सावधानी बरतें और इन्हें कुचलें ताकि मुल्क में आपसी सौहार्द बिगड़ने न पाए।
शहर काजी मुफ्ती शफीक अहमद शरीफी ने अलविदा की नमाज को जुटे नमाजियों को खिताब करते हुए शबेकद्र की फजीलतें भी बयां की। कहा, रात भर जागकर और इबादत करके उसे राजी करें। उन्होंने सदका के मसायल भी बताए। इसी तरह वसीउल्लाह मस्जिद रोशनबाग, अब्दुल्लाह मस्जिद, काटजू रोड, संगमरमर मस्जिद इलाहाबाद जंक्शन, हरी मस्जिद धोबीघाट, शाही मस्जिद नखासकोहना, खुसरोबाग, मस्जिदे आजम अतरसुइया, मक्का मस्जिद, अबूबकर मस्जिद करेली सहित शहर की तमाम मस्जिदों में अलविदा की खास नमाज अदा की गई।
शिया जामा मस्जिद, चक के इमाम जुमा व जमात मौलाना सैयद हसन रजा ने सरकार से मांग की है कि शिया वक्फ बोर्ड में बतौर सदस्य इमाम जुमा व जमात को भी शामिल किया जाए। उन्होंने कहा, हर शहर में शियाओं का एक ही इमाम जुमा व जमात होता है, ऐसे में उसे बोर्ड में शामिल किया जाना चाहिए। उनकी मौजूदगी से वक्फ की सपंत्तियों की बेहतर हिफाजत हो सकेगी। आज इलाहाबाद, लखनऊ सहित प्रदेश के कई जिलों में वक्फ जायदाद पर नाजायज कब्जे व अतिक्रमण बढ़ते जा रहे हैं, इसे रोकने की कोशिश होनी चाहिए।
आखिरी जुमा पर मस्जिदों में दुआ के लिए जब हाथ उठे तो मुल्क में अमन चैन, सलामती, लोगों की तरक्की, बेहतर बारिश और रोजी में बरकत आदि की दुआएं मांगी गई। वहीं जुमातुलविदा पर दुआओं के दौर के बीच शायर नदीम शिराजी ने कहा, ‘उरूज दे मेरी सरजमीं को संवार दे आसमां वाले, कि तेरी चौखट पे सिर झुकाए खड़े हैं हम जहांवाले।’