कार्यक्रम में हुई चार लेजर सर्जरी
‘प्रोस्टाकॉन 2023’ में दो ओपेन, तीन दूरबीन व चार लेजर विधि से सर्जरी का सजीव प्रसारण किया गया। वहीं रोबोटिक सर्जरी का सजीव नहीं, बल्कि एक ऑपरेशन की रिकार्डिंग दिखाई गई।
40 प्रतिशत मरीजों को पड़ती है आपरेशन की जरूरत
आगरा के जाने माने यूरोलॉजिस्ट प्रो. मधुसूदन अग्रवाल ने बताया कि प्रोस्टेट के मरीज को जैसे पेशाब बार-बार लगना, रात में ज्यादा पेशाब आना, खुलकर पेशाब न होना, पेशाब की धार पतली होना आदि दिक्कतें आने लगी लगती हैं। इसके लिए 40 प्रतिशत मरीजों को ऑपरेशन करने की आवश्यकता होती है। इसमें रोबोटिक सर्जरी भी काफी कारगर है। यह एक नई विधा है। लेजर पद्धति से आपरेशन किय़ा जाता है।
अधिकतर लोग एक उम्र के बाद प्रोस्टेट में होने वाली समस्या से अनभिज्ञ हैं। इसका कारण जागरूकता का अभाव है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि 60 की उम्र के बाद समय-समय पर जांच करवाते रहें और प्रोस्टेट होने पर जल्द-जल्द सर्जरी करा लें। - डॉ. दिलीप चौरसिया, यूरोलॉजिस्ट, स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय, प्रयागराज।