उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने का प्रस्ताव सरकार की ओर से खारिज कर दिए जाने के बाद चयन बोर्ड के दो सदस्यों की उम्मीदें भी खत्म हो गईं। चयन बोर्ड में नियुक्ति का दो वर्ष का कार्यकाल चार फरवरी को पूरा होते ही डॉ. आशाराम यादव एवं मनोज कुमार यादव को सचिव की ओर से कार्यमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया गया।
चयन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. परशुराम पाल ने सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष से पांच वर्ष करने का प्रस्ताव एक फरवरी को शासन को भेजा था। चयन बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि प्रदेश सरकार ने चयन बोर्ड के सदस्यों के पूर्व के आचरण को देखते हुए इस प्रस्ताव को बिना किसी विचार के खारिज कर दिया। दोनों सदस्यों ने भी कार्यकाल बढ़वाने की पूरी कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी।
चयन बोर्ड में कार्यकाल पूरा करने वाले सदस्य डॉ. आशाराम यादव तो अंतिम दिन बुधवार को कार्यालय में मौजूद रहे, लेकिन दूूसरे सदस्य मनोज कुमार यादव कार्यालय में नहीं थे। सूत्रों की मानें तो वह कार्यकाल बढ़ाने के लिए शासन स्तर पर दावा मजबूत करने की कोशिश में लगे रहेे। कार्यकाल खत्म होने के बाद डॉ. आशाराम को विदाई दी गई। डॉ. आशाराम यादव अपने कार्यकाल के दौरान प्रधानाचार्य के साक्षात्कार को लेकर खासे विवाद में रहे। इसके बाद शासन ने उन्हें कार्यवाहक अध्यक्ष के दायित्व से मुक्त करके डॉ. परशुराम पाल को अध्यक्ष बना दिया था।