मोबाइल, पेन ड्राइव, चिप, हार्ड डिस्क और एसएसडी जैसे उपकरणों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। यह वृद्धि प्रतियोगी छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और अन्य लाखों लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। मेमोरी कार्ड महंगी होने से पेनड्राइव के साथ प्रोजेक्ट व पढ़ाई महंगी हो गई है।
पेन ड्राइव, मेमोरी और अन्य इलेक्ट्रानिक्स स्टोरेज उपकरणों की बढ़ती कीमतों ने छात्रों, प्रतियोगी परीक्षार्थियों और शोधार्थियों का बजट बिगाड़ दिया है। जिले में लगभग 1950 मोबाइल की दुकानें हैं। कारोबारी रचित सेठ के अनुसार, जिले में 1500 से 1900 मोबाइल दुकानदार हैं। पहले यहां प्रतिदिन 500 से 1000 पेन ड्राइव और करीब 500 टैब बिकते थे लेकिन दाम बढ़ने से बिक्री आधी से भी कम हो गई है।
इंदिरा भवन व्यापार मंडल के अध्यक्ष आशीष अरोरा ने बताया कि 32 जीवी की पेन ड्राइव जो दो माह पहले 300 रुपये की थी, अब 750 रुपये से अधिक की हो गई है। इसी तरह, 1200 रुपये की हार्ड डिस्क अब तीन हजार रुपये से अधिक में मिल रही है। एसएसडी के दाम 1200 रुपये से बढ़कर 3200 रुपये के करीब पहुंच गए हैं। मोबाइल के मूल्य में 1.5 गुना वृद्धि हुई है।
दुकानदारों ने कहा एआई भी दाम बढ़ने की एक वजह
दुकानदार अजय मल्होत्रा, राशिद हुसैन, सूरज गिरि, शानू अशरावत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के कारण भी पेनड्राइव के दाम हुए दोगुने हो रहे हैं। दुकानदारों का कहा है कि बड़ी टेक कंपनियां अपने एआई मॉडल्स और डेटा सेंटर्स को चलाने के लिए भारी मात्रा में फ्लैश मेमोरी और हाई-स्पीड स्टोरेज खरीद रही हैं। एआई कंपनियां चिप निर्माताओं को बहुत ज्यादा दाम देकर सीधे फैक्ट्री से ही पूरा स्टॉक उठा रही हैं। इसके चलते आम ग्राहकों के लिए बनने वाली पेनड्राइव और मेमोरी कार्ड के लिए बाजार में फ्लैश मेमोरी की भारी कमी हो गई है।
मोबाइल फोन के भी बढ़े दाम
कारोबारी विपिन गुप्ता का कहना है कि जो मोबाइल पहले दस हजार रुपये में उपलब्ध थे, वे अब 20 हजार रुपये से अधिक के हो गए हैं। आईफोन के मूल्य भी बढ़ गए हैं। बाजार में रैम की भी बड़े पैमाने पर कमी पड़ गई है। दो माह के अंतराल में इन उपकरणों के मूल्य में दोगुने का अंतर आ गया है। इस महंगाई से मोबाइल दुकानदारों की बिक्री भी प्रभावित हुई है।
स्कूल और काॅलेज के प्रोजेक्ट, प्रेजेंटेशन, ई- बुक्स, वीडियो लेक्चर और शोध सामग्री सुरक्षित रखने के लिए इन उपकरणों की जरूरत पड़ती है। दाम बढ़ने से इसका असर स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ-साथ शोध छात्रों पर भी पड़ रहा है। - दीपक पुनेठा, ईसीईडी एमएनएनआईटी