उत्तर प्रदेश जल निगम में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति परिलाभों से की जा रही कटौती पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद जलनिगम ने भी आदेश जारी कर याचिका लंबित रहने तक कटौती और वसूली नहीं करने का आदेश जारी कर दिया है। जलनिगम द्वारा 2011 में नियमित हुए 4141 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पेंशन और अन्य लाभों में कटौती और किए जा चुके भुगतान की वसूली के आदेश जारी किए गए थे। इन आदेशों को कर्मचारियों द्वारा हाईकोर्ट में याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई थी ।
मनोज कुमार श्रीवास्तव और 73 अन्य तथा दूसरी तमाम याचिकाओं पर न्यायमूर्ति सरल कुमार श्रीवास्तव ने सुनवाई की। याचीगण के अधिवक्ता सौरभ प्रताप सिंह का कहना था कि उनकी नियुक्ति 1992 से 95 के बीच हुई थी। याचीगण को 2014 में नियमित किया गया। मगर उनको नियुक्ति की तिथि से नियमितिकरण का लाभ देने का निर्णय लिया गया। तब से याचीगण इसका लाभ पा रहे थे। इसके बाद सरकार ने यह निर्णय वापस लेते हुए नियमितिकरण की तिथि से ही लाभ दिए जाने का निर्णय लिया। जिसके क्रम में उनकी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति परिलाभों से कटौती व वसूली शुरू कर दी गई।
कोर्ट ने कटौती व वसूली के आदेशों पर रोक लगा दी थी। इस आदेश का अनुपालन करते हुए उत्तर प्रदेश जल निगम ने कर्मचारियों के अधिकारों में कटौती और वसूली के आदेश को न्यायालय के निर्णय होने तक के लिए स्वयं स्थगित कर दिया है। अब 2011 में नियमित हुए 4141 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पेंशन अथवा वेतन में किसी प्रकार की कटौती न्यायालय के निर्णय आने तक नहीं की जाएगी।