याची फरहान की ओर से तर्क दिया कि उसके द्वारा कहा गया शब्द अपमानजनक या अशोभनीय नहीं कहा जा सकता है, जो आईपीसी की धारा 504 के दायरे में आता है। याची ने कहा कि यह धारा तब लागू होती है जब व्यक्ति जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति को उकसाकर उसका अपमान करता है, जिससे शांति भंग होती हो। याची ने ऐसा नहीं कहा। याची द्वारा की गई टिप्पणी राजनीतिक थी, जिसके जरिए सार्वजनिक शांति भंग करने या किसी अपराध पर टिप्पणी करने के लिए उकसाने के लिए नहीं की गई थी।
हालांकि सरकारी अधिवक्ता ने इसका विरोध किया। कहा कि याची ने प्राथमिकी में आरोपों से इंकार नहीं किया है। वह एक राजनीतिक दल का प्रवक्ता है और अराजनीतिक बयान दिया, जिसे वायरल कर दिया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मौजूदा मामला आईपीसी की धारा 504 के दायरे में नहीं आता है। इस मामले में विचार करने की आवश्यकता है। लिहाजा, आरोपी को अंतरिम राहत दी जाती है। कोर्ट ने मामले में यूपी सरकार से तीन हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है।