इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाथरस सामूहिक दुराचार की घटना के विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर दर्ज प्राथमिकी में आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार से चार सप्ताह में याचिका पर जवाब मांगा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव की खंडपीठ ने कासगंज के नीरज किशोर मिश्र की याचिका पर दिया है। हाथरस में एक अक्तूबर 20 को दुराचार की घटना हुई। वाल्मीकि समाज ने पुलिस पर जांच में लापरवाही का आरोप लगाया।
इसी दौरान याची ने यह टिप्पणी की। सरकार की तरफ से कहा गया कि याची हिस्ट्रीशीटर है। उसका शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। उसके खिलाफ 11 दिसंबर को पटियाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। याची का कहना था कि जनतंत्र में विरोध का अधिकार है। उसके खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है। कोर्ट ने विवेचना जारी रखने का निर्देश दिया है।