लोकरस की 15 दिवसीय प्रस्तुतिपरक ग्रीष्मकालीन संगीत कार्यशाला पूरी हुई तो सोमवार को सांस्कृतिक केंद्र प्रेक्षागृह में जुटे युवाओं ने अपनी प्रस्तुतियो से लोकछवियों का ऐसा रंग बिखेरा कि सभी पर छा गए। एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों से उन्होंने सभी का दिल जीत लिया। सुपरिचित गायिका उमा दीक्षित की देखरेख में युवाओं ने लोकरंग के जितने आयाम सीखे, उसे और बेहतर तरीके से मंच पर प्रस्तुत किया।
लोकसंगीत की सुमिरनी विधा में ‘प्रथमे मैं सुमरुश्री गणेश को दूजे सरस्वती महारानी हो राम’ से शुरुआत के बाद उन्होंने पचरा में ‘मइया के भवनवा करब दरसनवा जगत जननी मइया’ और नकटा में ‘आने दो परदेसी बलम को’सुनाया। इसी तरह ‘हाली हाली गोरिया चला डगरिया’, बियाह में ‘सोवत रहलू मैं माई के कोरवा निंदिया उचटि गइली आजू हो’, गारी में ‘हे अजोधिया में होवे धम धड़कन सीता राम से भेजो’, लचारी में ‘कइसे काटी दोपहरिया अकेले घरवा’, होरी में ‘वृंदावन श्याम खेलत होरी वृंदावन’ जैसी प्रस्तुतियों से तालियां बटोरीं। हारमोनियम पर उदय परदेसी, ढोलक पर संजीत सिंह, तबला पर बृजेश अवस्थी और पैड पर मनोज से शानदार संगत देकर कार्यक्रम को प्रभावी बनाया। मुख्य अतिथि महापौर अभिलाषा गुप्ता ने दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। बतौर विशिष्ट अतिथि संगीत समिति सचिव अरुण कुमार और आरडी वर्मा मौजूद थे।
कार्यक्रम में रेखा सेन, श्रुति, प्रिया, रचना, प्रतिभा, खुशी, स्नेहा, प्रियंका, भारती, रश्मि, करुणा, शिवांगी, विपिन, कमला, प्रीति, शिप्रा, पूजा, सुबूही, पूजा, अर्पिता, प्रतिभा, शिवांगिनी, दिव्या, ज्योति, श्रद्धा, मनोज, सत्यम, शुभम, रंजीत, सूरज, अनुपम, जगजीत, संजीत, दीपक, शैलेश, विनय, जिलाजीत, दुर्गेश, विकास, साहिल, सौरभ, राहुल, पवन, विनोद, शचींद्र, राज, अखिलेश, अजीत, शिव कुमार, बृजलाल, राहुल, सौरभ, विपिन आदि शामिल थे।