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पुस्तकालयों को दें डिजिटल स्वरूप-प्रो. यादव

Thu, 13 Aug 2015 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। शैक्षणिक गुणवत्ता में पुस्तकालयों की अहम भूमिका होती है। किसी भी शैक्षणिक एवं शोध संस्थान का हृदय उसका पुस्तकालय ही होता है। यह बातें अवधेश प्रताप सिंह विवि रीवा के कुलपति प्रो. केएनएस यादव ने केंद्रीय राज्य पुस्तकालय की ओर से पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एसआर रंगनाथन की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में पुस्तकालयों को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित करके शैक्षणिक गुणवत्ता कायम रखा जा सकता है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि के  पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. टीएन दुबे ने कहा कि भारत में पुस्तकालयों के विकास के साथ ही पुस्तकालय विज्ञान की शिक्षा के विकास में डॉ. रंगनाथन केयोगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।

सारस्वत अतिथि इलाहाबाद विवि के उप पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. बीके सिंह ने कहा कि डॉ. रंगनाथन के पुस्तकालय विज्ञान के पंच सूत्र आज भी प्रासंगिक हैं। इस मौके पर प्रो. वीपी खरे, डॉ. रत्नाकर शुक्ल, डॉ. सत्य प्रकाश त्रिपाठी, प्रो. एमपी जैन मौजूद रहे। स्वागत डॉ. आरजे मौर्य ने धन्यवाद रवि यादव ने किया। संचालन डॉ. ज्ञान प्रकाश यादव ने किया। इस मौकेपर उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि के प्रो. एसपी गुप्ता, डॉ. एमएन सिंह, डॉ. आरपीएस यादव, डॉ. मीरा पाल, शैलेश यादव, डॉ. सर्वेश यादव मौजूद रहे।
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