गंगा-यमुना का जलस्तर अब शहर के कछारी इलाकों तक पहुंच गया है। इससे स्थानीय किसानों की फसलें डूब गई हैं। सब्जियों की पैदावार पानी में डूबने और दूसरे राज्यों से आपूर्ति कम होने से थोक मंडी से लेकर फुटकर बाजारों तक सब्जियों के दाम बेकाबू होने लगे हैं।
खुल्दाबाद, गऊघाट, तिकोनिया, लोकनाथ और चौफटका में सब्जियों के तेवर तीखे हो गए हैं। फुटकर बाजार में अदरक 200 से 250 रुपये प्रति किलो और लहसुन 200 से 300 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। सब्जी विक्रेताओं का दर्द है कि उन्हें खुद ही मंडी से माल महंगे दामों पर मिल रहा है।
हालांकि, फुटकर में आलू 22-25 रुपये प्रति किलो ही मिल रहा है। थोक में प्याज का दाम 12 से बढ़कर 15-16 रुपये किलो हो गया है जबकि फुटकर में प्याज का भाव 30 से 35 रुपये किलो है। टमाटर की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। इस वजह से थोक में इसका दाम बढ़कर 30 रुपये और फुटकर में 50 प्रति किलो तक पहुंच गया है।
शिमला मिर्च 120 से 150 रुपये किलो
गऊघाट के सब्जी विक्रेता गुलाब अग्रहरि बताते हैं कि फुटकर में नेनुआ 40 रुपये, बैंगन 40 रुपये, कद्दू 30 से 40 रुपये, भिंडी 50 रुपये और परवल 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है। रामबाग की पुष्पांजलि सिंह ने कहती हैं कि शिमला मिर्च 120 से 150 रुपये प्रति किलो के दाम पर बिक रही है। मुंडेरा फल सब्जी व्यापार महासंघ के अध्यक्ष सतीश कुशवाहा के मुताबिक, बारिश के कारण मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से प्रयागराज की थोक मंडी तक पहुंचने वाली गाड़ियों की रफ्तार धीमी पड़ गई है। इससे बाहरी आवक पर भारी ब्रेक लगा है। पूरी तरह से कछार डूबने के बाद सब्जियों का दाम और बढ़ सकता है।