प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के समर्थन में प्रियंका गांधी वाड्रा भी उतर आई हैं। छात्र परिषद के विरोध में आंदोलन करने वाले छात्रसंघ उपाध्यक्ष अखिलेश यादव के निलंबन और उन्हें ब्लैक लिस्ट किए जाने पर प्रियंका गांधी ने ऐतराज जताया है और ट्वीट कर कहा है कि यह तानाशाही नहीं तो क्या है।
सात साल पहले प्रियंका गांधी के भाई राहुल गांधी की बदौलत ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ की बहाली हुई थी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में वर्ष 2011 में भी छात्रसंघ की जगह छात्र परिषद का मॉडल लागू किया गया था। उस वक्त भी व्यापक पैमाने पर आंदोलन हुआ था। केंद्र में यूपीए की सरकार थी। मामले में सीधे राहुल गांधी ने हस्तक्षेप किया था और तत्कालीन कुलपति को दिल्ली तलब कर लिया गया था। राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद वर्ष 2012 में छात्रसंघ बहाल कर दिया गया।
इस बार छात्रों को प्रियंका गांधी वाड्रा का साथ मिला है। प्रियंका ने अपने ट्वीट में कहा है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ को भंग करने के खिलाफ आवाज उठाने पर एनएसयूआई से छात्रसंघ उपाध्यक्ष अखिलेश यादव को इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने निलंबित और ब्लैक लिस्टेड कर दिया है। भाजपा सरकार को खुद चुनकर आई है। मगर छात्रों के चुनाव और उनकी आवास से इतना डरती क्यों है? यह तानाशाही नहीं तो क्या है?
निलंबन वापस लेने के लिए छात्रों ने दिया ज्ञापन
छात्रसंघ उपाध्यक्ष अखिलेश यादव की निलंबन वापस लिए जाने की मांग को लेकर एनएसयूआई का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को चीफ प्रॉक्टर से मिलने पहुंचा। हालांकि, चीफ प्रॉक्टर छुट्टी पर चल रहे हैं। चीफ प्रॉक्टर कार्यालय में डॉ. राकेश सिंह से छात्रों की मुलाकात हुई। उन्होंने छात्रों से ज्ञापन लिया और आश्वस्त किया कि चीफ प्रॉक्टर के लौटने पर निलंबन वापस लिए जाने के मुद्दे पर उनसे बात की जाएगी। इस दौरान एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष पृथ्वी प्रकाश तिवारी, अमित, सादिक, यमन, शशांक, जितेंद्र आदि मौजूद रहे।