इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि निजी लेनदेन और नफा-नुकसान से जुड़े मामले जनहित का मुखौटा पहनकर पेश नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी संग मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने कुशीनगर निवासी अभिनेंद्र प्रताप सिंह व तीन अन्य की जनहित याचिका खारिज कर दी।
याचियों ने कप्तानगंज तहसील के मौजा बसहिया में जमीन की रजिस्ट्री के दौरान डिप्टी रजिस्ट्रार (स्टाम्प) की ओर से खरीदारों से वसूली जा रही दो प्रतिशत अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी पर रोक लगाने की मांग की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याची वास्तव में खुद की संपत्तियों की रजिस्ट्री पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क से परेशान है। इसके लिए वह जनहित याचिका के जरिये राहत की गुहार नहीं लगा सकते, हालांकि उनके लिए स्टाम्प कमिश्नर या अन्य राजस्व न्यायालय की शरण में जाने के रास्ते खुले हैं।