खंडपीठ ने पाया कि महिला न तो आरबीआई की कर्मचारी थी और न ही वह किसी आधिकारिक काम से बैंक आई थी। वह विजयानंद से मिलने के लिए कार्यालय आई थी। कोर्ट ने रिकॉर्ड में मौजूद परिस्थितियों को देखते हुए यह संभावना स्वीकार की कि दोनों के बीच निजी विवाद था, जो बाद में परिवार न्यायालय तक पहुंचा। कोर्ट ने कहा कि विजयानंद पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसलिए ने सक्षम प्राधिकारी को बर्खास्तगी से सेवानिवृत्ति तक की अवधि के बकाया वेतन के दावे पर तीन महीने के भीतर फैसला करने और कानून के अनुसार परिणामी सेवानिवृत्त लाभों पर विचार करने का निर्देश दिया।