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यूपी बोर्डः प्रधानाचार्यों का ‘हिस्सा’ प्रत्येक छात्र सिर्फ 25 पैसा

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Prinicipal shares per student is 25 paisa only. - फोटो : AU
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प्रयागराज। यूपी बोर्ड ने परीक्षा शुल्क में ढाई से तीन गुने की बढ़ोतरी तो कर दी, लेकिन प्रधानाचार्यों को मिलने वाली प्रयोगार्थ राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की। वर्षों से प्रधानाचार्यों को प्रत्येक छात्र के हिसाब से सिर्फ 25 पैसे ही मिल रहे हैं, जबकि बोर्ड दसवीं में 500 और बारहवीं में 600 रुपये परीक्षा शुल्क प्रत्येक छात्र-छात्रा से लेगा। बोर्ड के इस कदम से प्रधानाचार्यों में नाराजगी है।
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प्रधानाचार्यों ने परीक्षा शुल्क बढ़ाने के बाद भी उनकी प्रयोगार्थ राशि में बढ़ोतरी न करने को मनमानी बताया है। उनका कहना है कि महंगाई के दौर में दसवीं और बारहवीं के ऑनलाइन आवेदन का खर्च 25 पैसे में पूरा नहीं होता। इलाहाबाद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सभापति तिवारी का कहना है कि बोर्ड की ओर से बीते 25 वर्ष से अधिक समय से परीक्षा शुल्क में लगातार वृद्धि की गई, लेकिन प्रधानाचार्यों की प्रयोगार्थ राशि मात्र 25 पैसे ही आ रही है। कहा, इसी 25 पैसे में प्रधानाचार्य को नौवीं एवं ग्यारहवीं का पंजीकरण, 10 वीं-12वीं का ऑनलाइन परीक्षा फार्म, यू-डायस के 25 पेज का ऑनलाइन विवरण सहित स्कूल में खाली पदों का विवरण भी भेजने को कहा जाता है, जो संभव नहीं है। जाहिर है, अपनी जेब से ही लगाना पड़ता है। शासन अथवा बोर्ड की ओर से इसका कोई खर्च नहीं मिलता है।
प्रधानाचार्य परिषद नाराज
प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष ब्रजेश शर्मा का कहना है कि शासन एवं बोर्ड की ओर से हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की परीक्षा में प्रश्नपत्रों की संख्या कम होकर एक तिहाई हो गई। इसके बाद भी यूपी बोर्ड ने परीक्षा शुल्क में ढाई से तीन गुने की वृद्धि कर दी है। यह वृद्धि गरीब छात्रों के हक पर हमला है। परिषद के मीडिया प्रभारी एसपी तिवारी ने बताया कि बोर्ड का ध्यान परीक्षा शुल्क में मिलने वाले प्रधानाचार्यों के कम हिस्से को लेकर बार-बार आकृष्ट किया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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प्रधानाचार्यों की मांग को शासन के पास भेजा जाएगा, अंतिम निर्णय शासन को लेना है। - शिवलाल, अपर सचिव प्रशासन, यूपी बोर्ड
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