इलाहाबाद (ब्यूरो)। हाईकोर्ट ने 20 हजार पुलिस कांस्टेबलों की बर्खास्तगी के मामले में प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक की अवमानना अपील खारिज कर दी है। इन अधिकारियों ने अवमानना अदालत के पांच मार्च 2014 के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को प्रथम दृष्टया अवमानना का दोषी मानते हुए आरोप तय करने के लिए तलब किया गया था। अपील तत्कालीन प्रमुख सचिव गृह अनिल कुमार गुप्ता और तत्कालीन डीजीपी एएल बनर्जी द्वारा दाखिल की गई थी। इस पर न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति विजय लक्ष्मी की खंडपीठ ने सुनवाई की।
प्रकरण के अनुसार वर्ष 2007 में दो शासनादेशों के जरिए करीब 20 हजार पुलिस कांस्टेबलों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। बर्खास्त कांस्टेबलों ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। प्रदेश सरकार ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में दाखिल विशेष अनुमति याचिका भी बाद में वापस ले ली। कांस्टेबलों को 27 मई 2009 को सेवा में बहाल कर दिया गया। उन्होंने बर्खास्तगी अवधि का वेतन दिए जाने की मांग की थी।
कहा गया कि जब कानून की नजर में बर्खास्तगी अवैध है तो फिर उनकी सेवा को नियमित मानते हुए पिछला वेतन और भत्ते दिए जाएं। इस मामले पर दाखिल अवमानना याचिका पर कोर्ट ने पांच मार्च 2014 को दोनों अधिकारियों को अवमानना का आरोप तय करने के लिए तलब किया था। अधिकारियों ने इस आदेश को चुनौती दी। खंडपीठ ने कहा कि चूंकि एकल जज का आदेश अंतरिम आदेश है और याचीगण को कोई सजा नहीं दी गई है, इसलिए अवमानना अपील पोषणीय नहीं है।