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इविवि के कुलपति पर फैसला राष्ट्रपति करेंगे

Tue, 04 Oct 2016 02:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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ratan lal hanglu
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरएल हांगलू के खिलाफ मिली शिकायत को राष्ट्रपति के पास भेज दिया है। कुलपति के खिलाफ विवि में शिक्षकों के खाली पदों को भरने में मनमानी, अनुशासन सहित विवि के शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में फेरबदल करने का आरोप है। दूसरी ओर कुलपति प्रो. आरएल हांगलू को एमएचआरडी की ओर से तत्काल प्रभाव से लंबी छुट्टी पर भेजने की बात सामने आ रही है। इविवि में यह चर्चा आम रही कि सोमवार को एमएचआरडी से पत्र आने के बाद कुलपति को 45 दिन की छुट्टी पर भेज दिया गया है। डीन लॉ के पद पर प्रो. बीपी सिंह की वापसी इसी पत्र से जोड़कर देखी जा रही है।
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कुलपति के खिलाफ शिक्षक भर्ती में मनमानी, छात्रों को मनमानी तरीके से निष्काषन, प्रवेश परीक्षा को लेकर गड़बड़ी सहित वित्तीय अनियमिता के आरोप लगे हैं। कुलपति को लंबी छुट्टी पर भेजे जाने की सूचना के बारे में विवि रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। कुलपति के खिलाफ मिली शिकायत के आधार पर उन्हें कारण बताओ नोटिस या जांच का फैसला राष्ट्रपति (विवि के विजिटर) प्रणब मुखर्जी करेंगे। जांच का अधिकार मात्र विजिटर के पास होता है। मंत्रालय ने इसीलिए फाइल राष्ट्रपति केपास भेज दी है।

कुलपति प्रो. हांगलू ने आते ही शिक्षकों एवं छात्रों को लेकर सख्त नियम बनाए थे परंतु किसी नियम पर अमल नहीं हो सका। कुलपति पर कुछ वरिष्ठ शिक्षकों के खिलाफ मनमाने तरीके से कार्रवाई का आरोप लगा। इस मामले में कोर्ट ने कुलपति के फैसले को पलट दिया। इविवि में इस समय शिक्षकों के करीब 40 फीसदी पद खाली हैं। इसके लिए संविदा शिक्षकों से काम लिया जा रहा है। इस कारण से बड़ा तबका कुलपति के खिलाफ हो गया। शिक्षक भर्ती के लिए गठित विभाग की शिकायत के बाद निदेशक को हटा दिया गया। कैंपस में छात्र संगठनों पर लगाम लगाने के बाद कई बड़ी पार्टियों के छात्र संगठन नाराज हैं। इससे पहले भी कुलपति ने पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी पर विश्वविद्यालय के कामकाज में दखल देने का आरोप लगाया था। मई 2016 में कुलपति के इस बयान पर संसद सत्र के दौरान जमकर हंगामा हुआ था, लेकिन बाद में कुलपति ने अपने बयान पर सफाई दी कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा था। मंत्री तो उनके काम में सहयोग करती हैं।
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