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त्वरित न्याय को मुकदमों का शीघ्र निस्तारण जरूरी

Mon, 14 Mar 2016 02:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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राष्ट्रप‌त‌ि - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि त्वरित न्याय के लिए मुकदमों का शीघ्र निस्तारण जरूरी है। आपराधिक मुकदमों में ट्रायल दिन प्रति दिन के आधार पर हो। मुकदमों में अनावश्यक तारीखें न लगें और अंडर ट्रायल बंदियों को सीआरपीसी के प्रावधानों के तहत रिलीज किया जाए। देश की जनता को न्यायपालिका पर अटूट भरोसा है। समाज का कोई भी तबका आर्थिक या सामाजिक आधार पर न्याय से वंचित नह रहे। वैकल्पिक न्याय प्रणाली का विकास और प्रचार प्रसार पर भी जरूरी है। न्यायालयों के मूलभूत ढांचे का विकास जरूरी है। देश भर में नए न्यायालय भवन बनाए जा रहे हैं। न्यायालयों को कंप्यूटरीकरण और ई-कोर्ट प्रोजेक्ट से जोड़ा जा रहा है।
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हाईकोर्ट इलाहाबाद की स्थापना के 150 वें वर्ष पर आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ने न्यायप्रक्रिया को सरल बनाने पर भी जोर दिया। कहा, सरकार स्वयं वादकारी है, इसलिए उसे भी अपने मुकदमों में कमी लानी चाहिए। मुकदमों के शीघ्र निस्तारण के लिए बार और बेंच का सहयोग जरूरी है। दोनों को साथ मिलकर काम करना चाहिए। लंबित मुकदमों में कमी लाने को जजों के रिक्त पदों को भरा जाना जरूरी है। मौजूदा समय में देश के उच्च न्यायालयों में 1056 जजों के स्वीकृत पदों के सापेक्ष 591 जज कार्यरत हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी 160 स्वीकृत पदों के स्थान पर फिलहाल सिर्फ 71 जज ही पद पर हैं। अधीनस्थ न्यायालयों में भी और 16,000 न्यायिक अधिकारियों की आवश्यकता है।

राष्ट्रपति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट बार की गौरवशाली परंपरा को याद किया। कहा, यहां की बार ने देश को तमाम महान विभूतियां दी हैं। पंडित मोतीलाल नेहरू, जवाहर लाल नेहरू, महामना मदन मोहन मालवीय, टीबी सप्रू, केएन काटजू सरीखे वकीलों ने महान परंपराओं की नींव रखी है। वकील व्यावसायिक दायित्व का निर्वाह करें।  वहीं यहां के छह जज सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं जबकि एक जज इंटरनेेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के भी जज रहे हैं। उत्तर प्रदेश की न्यायपालिका देश की जनसंख्या के छठें हिस्से की सेवा कर रही है।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर ने कहा, देश की न्यायपालिका के समक्ष भीतर और बाहर दोनों ही तरह की तमाम चुनौतियां हैं। मुख्य चुनौती, विश्वसनीयता को बनाए रखने की है।

डेढ़ सौवें स्थापना वर्ष में हम अधिकतम मुकदमों के निस्तारण का संकल्प लें, यही इस न्यायालय की स्थापना में सहयोग करने वाले जजों और वकीलों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कानून मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने कहा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पेपरलेस कोर्ट की दिशा में कदम बढ़ाया है, जो सराहनीय है। हाईकोर्ट के तमाम फैसलों ने प्रदेश ही नहीं देश को भी दिशा दी है। राज्यपाल रामनाईक ने कहा, संविधान के तीनों स्तभों विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में सामंजस्य जरूरी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट, कानून के राज का जीता जागता उदाहरण है। यहां के फैसलों ने देश की करवट बदली है। मुकदमों के निस्तारण में होने वाले देरी को गंभीरता से लेना चाहिए।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, प्रदेश सरकार ने न्यायपालिका के मूलभूत ढांचे के विकास के  लिए महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। वर्तमान सरकार ने न्यायपालिका का बजट 1700 करोड़ रुपये से बढ़ा 3100 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष कर दिया है। अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए भी सरकार निरंतर प्रयासरत है।

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डा.डीवाई चंद्रचूड ने अतिथियों का स्वागत करते हुए हाईकोर्ट की उपलब्धियां गिनाईं। कहा, बीते तीन वर्षों में लंबित मुकदमों में कमी आई है। आठ लाख नए मुकदमे भी दाखिल हुए हैं। समारोह को यादगार बनाने के लिए राष्ट्रपति ने स्मारिका के विमोचन सहित दस रुपये का सिक्का और दो डाक टिकट जारी किए। धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ न्यायमूर्ति राकेश तिवारी ने किया।
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