इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन के आधार पर सिद्ध नहीं हो सकता कि घटना के दो हत्यारोपी एक साथ मौजूद थे। इसके लिए हत्या के तथ्याें को जोड़ने वाली परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी अटूट और विश्वसनीय होनी चाहिए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन के आधार पर सिद्ध नहीं हो सकता कि घटना के दो हत्यारोपी एक साथ मौजूद थे। इसके लिए हत्या के तथ्याें को जोड़ने वाली परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी अटूट और विश्वसनीय होनी चाहिए।
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इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने पति की हत्या में दोषी ठहराई गई शिकोहाबाद निवासी हसनेरा उर्फ शबाना और उसके दोस्त शाहरुख को बेगुनाह करार देते हुए बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन की कहानी का आधार आरोपियों के मोबाइल कॉल डिटेल्स ही है। जबकि, मोबाइल टावर के दायरे में दो फोन का होना यह प्रमाणित नहीं करता कि उनके उपयोगकर्ता भी उसी स्थान पर मौजूद थे। कोई व्यक्ति अपना मोबाइल एक जगह छोड़कर दूसरी जगह जा सकता है।
अभियोजन के मुताबिक, नईम की 2023 में एक जनवरी को शिकोहाबाद में ईंट भट्ठे के पास हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि हसनेरा और शाहरुख ने दोस्ती के कारण दोनों ने मिलकर नईम की हत्या की। हालांकि, मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। इन्हीं आधारों पर ट्रायल कोर्ट ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों को हत्या से जोड़ने वाली परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी और विश्वसनीय कड़ी स्थापित करने में विफल रहा। कोर्ट ने पुलिस के सामने कबूलनामे, घटनास्थल से मिली खून लगी ईंट को भी निर्णायक साक्ष्य नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि महत्वपूर्ण कड़ियां गायब हैं और परिस्थितियां ऐसी पूर्ण श्रृंखला नहीं बनातीं, जिससे आरोपियों की दोषसिद्धि ही निष्कर्ष रूप में सामने आए। कोर्ट ने दोनों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया और निर्देश दिया कि किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हो तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।