भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की 151 वर्ष पुरानी इलाहाबाद शाखा (मुख्य शाखा) को भारत सरकार ने धरोहर घोषित किया है। एसबीआई प्रबंधन इस बैंक भवन के मूल स्वरूप में छेड़छाड़ कर धरोहर को नष्ट करने का काम कर रहा है। एसबीआई इलाहाबाद शाखा की स्थापना 150 वर्ष पूर्व बैंक ऑफ बंगाल के नाम से 17 मार्च 1863 को हुई थी। जुलाई 1929 में इस बैंक का नाम बदलकर इम्पीरियल बैंक कर दिया गया। देश को आजादी मिलने के बाद एक बार फिर जुलाई 1955 में इम्पीरियल बैंक का नाम बदलकर भारतीय स्टेट बैंक कर दिया गया।
एसबीआई की मुख्य शाखा के 150 वर्ष पूरा होने पर वर्ष 2013 में भारत सरकार के आर्कोलॉजिक सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की ओर से इस भवन को धरोहर (हेरीटेज) घोषित किया गया था। मुख्य शाखा को एसबीआई प्रबंधन ने 20 अक्तूबर को तीन भागों त्रिवेणी, सरकारी सेवाएं और एनआरआई में बांट दिया था। अब बैंक प्रबंधन विभाजन के बाद 151 वर्ष पुराने भवन को तोड़कर उसको नया स्वरूप दे रहा है। बैंक के बाहरी दीवार को तोड़कर उसमें नए दरवाजे खोलने के साथ अंदर की दीवारें तोड़ने के साथ नई दीवारें बनाईं जा रही हैं।
एसबीआई की ओर से हेरीटेज घोषित भवन को तोड़ने और उसकी दीवारों को क्षतिग्रस्त करने की कोशिश को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुरातत्व विद् एवं इतिहासकार डॉ. डीपी दुबे ने गलत बताया है। उनका कहना है कि धरोहर घोषित किसी भवन के मूल स्वरूप को नष्ट करना अपराध है। इसके लिए बैंक को एएसआई से अनुमति लेना आवश्यक होता है।