माघ मेला तेजी से बसने लगा था और हर तरफ साधु-संतों का जमावड़ा भी होने लगा था। पांच जनवरी को पौष पूर्णिमा के पहले स्नानपर्व के मद्देनजर विभाग तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगे हुए थे। जगह-जगह तंबू लग चुके थे और शिविरों का विस्तार तेजी हो रहा था लेकिन बृहस्पतिवार को हुई जोरदार बारिश ने मेले की तैयारियों को धुलकर रख दिया। तमाम शिविरों में पानी घुस गया। जमीन दलदली हो गई। जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने और शिविरों तक बिजली एवं पानी का कनेक्शन न पहुंचने के कारण हालात और बदतर हो गए। कई जगह मेला बसने से पहले ही उजड़ने जैसा नजारा दिखा। अफसर दिनभर मेला क्षेत्र में घूमकर अव्यवस्था से निपटने की रणनीति बनाते रहे लेकिन लगातार बारिश के कारण कोई काम नहीं हो सका।
मेले के लिए शासन ने 28 करोड़ रुपये जारी किए हैं और इस रकम का बड़ा हिस्सा तैयारियां पर खर्च भी हो चुका है। बारिश में अव्यवस्था से निपटने का दारोमदार जल निगम पर था। जगह-जगह पॉन्ड बनाए जाने थे और जल निकासी के लिए नालियों का निर्माण भी होना था। ज्यादातर मुख्य मार्गों पर नालियां बना दी गईं लेकिन गाटा मार्ग पर नाली का निर्माण कार्य काफी पिछड़ा हुआ है। पॉन्ड का निर्माण कार्य भी बिल्कुल ठप पड़ा हुआ है। ऐसे में बृहस्पतिवार को हुई जोरदार बारिश ने मेले की तैयारियों को चौपट कर दिया। सभी तैयारियां पिछड़ गईं। अगर शुक्रवार को बारिश नहीं हुई तो भी स्थिति सामान्य होने में दो से तीन का वक्त लग जाएगा। बारिश ऐसे ही जारी रही तो मेला प्रशासन के लिए चुनौती और बढ़ जाएगी। हालांकि बारिश के बाद मेला क्षेत्र में कई जगह पंप चलाकर जल निकासी की कोशिश की गई लेकिन मौजूदा व्यवस्था नाकाफी दिखी। जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण तमाम शिविरों में पानी भर गया। बिजली विभाग ने ज्यादातर शिविरों को अभी कनेक्शन भी नहीं दिया है। ऐसे में रात के वक्त इन शिविरों में अव्यवस्था और बढ़ गई। मेला क्षेत्र में अस्थायी शौचालचों के निर्माण का काम भी अधूरा है। बारिश के कारण बृहस्पतिवार को यह काम भी पूरी तरह से ठप रहा। इसके अलावा मेला से जुड़े दूसरे कार्यों में भी बारिश बाधा बनी रही। मेला क्षेत्र में जगह-जगह कीचड़ हो जाने से कई वाहन भी फंस गए। कुछ शिविरों में हालात इतनी बदतर हो गई कि कुछ साधु संतों को शिविर छोड़कर हटना पड़ा। फिलहाल अफसर अब इसी इंतजार में हैं कि बारिश थमे और मेला क्षेत्र में फैली अव्यवस्था को जल्द से जल्द दूर किया जा सके। एसके शर्मा, एडीएम सिटी ने बताया कि ‘अगर शुक्रवार को बारिश नहीं हुई तो मेले की तैयारियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। पंपिंग सेट पर्याप्त संख्या में हैं। जलभराव की स्थिति में दिक्कत नहीं होगी। जहां कीचड़ हुआ है, वहां बालू डलवाई जा रही है।