रामघाट, काली घाट, नागवासुकी, श्मशान घाट, महावीर घाट, अक्षयवट घाट व संगमनोज के दोनों किनारे जलकुंभी से पट गए हैं। जलकुंभी लगने से स्नानार्थियों व पुरोहितों को तटों पर डुबकी लगाने में दिक्कतें आने लगी हैं। बृहस्पतिवार को छतनाग के पास गंगा का जलस्तर 72.44 मीटर रिकार्ड किया गया।
जबकि दो दिन पहले 16 जून को इस घाट जलस्तर 72. 07 मीटर था। प्रवाह बढ़ने से जलस्तर में तेजी आने की बात कही जा रही है। सिंचाई बाढ़खंड के एक्सईएन ब्रजेश कुमार सिंह ने बांधों के स्ल्यूज गेज का निरीक्षण करने के साथ ही उनकी मरम्मत शुरू कराने का निर्देश दिया, ताकि समय रहते फाटक दुरुस्त किए जा सकें।
उन्होंने बताया कि इस बार समय से मानसून आने की वजह से बाढ़ से निबटने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गंगा -यमुना के घाटों के अलावा बांधों के तटबंधों की मॉनीटरिंग कराई जा रही है। कटान रोकने के लिए बालू की बोरियों को भरने का काम शुरू कर दिया गया है।
पानी बढ़ने के साथ ही घाटों से तीर्थपुरोहितों के तख्त और झंडे समेटने की तैयारी कर ली गई है। तीर्थपुरोहित राजमणि तिवारी और रमेश कुमार मिश्रा ने बताया कि तीन दिन से लगातार पानी बढ़ रहा है। इस वजह से चिंता बढ़ गई है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित, 97 बाढ़ चौकियां
बारिश शुरू होने और गंगा के जलस्तर में तेजी आने के साथ ही सिंचाई विभाग के बाढ़खंड़ ने सतर्कता बढ़ा दी है। संगम स्थित बेनी बांध पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिया गया है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष से गंगा -यमुना पर बने बांधों से जल प्रवाह की स्थितियों पर नजर रखी जा रही है, ताकि समय आने पर जरूरी कदम उठाए जा सकें। जिले में 97 बाढ़ चौकियां स्थापित कर दी गई हैं।