वर्ष भर के भीतर देश के व्यस्तम रेल मार्ग में शामिल दिल्ली-हावड़ा रूट पर चलने वाली ट्रेनों की लेटलतीफी कम हो जाएगी। यह संभव होगा ईस्टर्न डेडिकेटड फ्रेट कॉरीडोर (डीएफसीसी) के निर्माण से। क्योंकि इसी वर्ष प्रयागराज में यमुना नदी पर इस रेल मार्ग के लिए बनाए जा रहे पुल का निर्माण पूरा हो जाएगा। साथ ही वर्ष भर के भीतर खुर्जा से मुगलसराय (अब दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन) के बीच डीएफसीसी शुरू होने के बाद एनसीआर रूट पर चलने वाली मालगाड़ियां इसमें शिफ्ट कर दी जाएगी। इससे एनसीआर रूट पर चलने वाली ट्रेनों की लेट लतीफी पर काफी हद तक अंकुश लगेगा।
डीएफसीसी का निर्माण विश्व बैंक के सहयोग से चल रहा है। इसी को देखने के लिए विश्व बैंक का दो सदस्यीय टीम बृहस्पतिवार को प्रयागराज पहुंची। इस टीम ने यमुना पर बन रहे नए ब्रिज के साथ सूबेदारगंज में बनाए गए ऑपरेशन कंट्रोल सेेंटर (ओसीसी) का निरीक्षण किया। दरअसल पंजाब के लुधियाना से पश्चिमी बंगाल के दानकुनी तक कुल 1856 किलोमीटर लंबा ईस्टर्न डीएफसी का निर्माण चल रहा है। वर्तमान समय खुर्जा से लेकर भदान तक अप लाइन में माल गाड़ियों का संचालन इस कॉरीडोर में शुरू हो गया है।
डीएफसीसी अफसरों का दावा है कि 31 मार्च तक कानपुर के भाऊपुर से खुर्जा तक मालगाड़ियों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। बृहस्पतिवार को प्रयागराज पहुंचे डीएफसीसीआईएल के मैनेजिंग डायरेक्टर अनुराग सचान ने बताया कि डीएफसी पर मालगाड़ियां शिफ्ट होने के बाद यात्री ट्रेनों की भी स्पीड में इजाफा होगा। कहा कि प्रयास किया जा रहा है कि सूबेदारगंज में 75 करोड़ रुपये की लागत से बने ओसीसी का उद्घाटन 29 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ करवाया जाए। इस दौरान वर्ल्ड बैंक के अंशुमान शर्मा, अतुल अग्रवाल आदि मौजूद रहे। यह टीम शुक्रवार को कानपुर जाएगी।